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जिस नहर से थी सिंचाई की आस उसी में उग आई घास

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गरुड़ की रिठाड़ नहर - फोटो : GARUD
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गरुड़ (बागेश्वर)। किसानों और काश्तकारों के लिए योजनाओं के दावे तो बहुत किए जाते हैं लेकिन हकीकत इनसे कोसों दूर है। गरुड़ क्षेत्र खेती-किसानी के लिए काफी मुफीद माना जाता है। क्षेत्र से पलायन रोकने में भी कृषि काफी हद तक सहायक है। कृषि की बेहतरी सिंचाई पर निर्भर है लेकिन सिंचाई के हाल कुछ ठीक नहीं हैं।
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सिंचाई उप खंड बैजनाथ की रिठाड़ नहर एक साल से बंद पड़ी है। विभाग की अनदेखी के चलते नहर जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। जिस नहर से सिंचाई के लिए पानी की आस थी उसी नहर में अब घास उग आई है। सिंचाई विभाग नहर को शीघ्र दुरुस्त नहीं करेगा तो रिठाड़, देवनाई,भतेडिया, सरोली, बंतोली गांव के काश्तकार 150 नाली भूमि में इस बार धान की रोपाई नहीं कर पाएंगे।
नहर देवनाई घाटी की सबसे बड़ी नहर है। सिंचाई विभाग ने नहर की मरम्मत में एक साल पूर्व लाखों रुपये खर्च किये। विभाग ने नहर के निर्माण में घटिया सामाग्री का प्रयोग करने से नहर से पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिससे काश्तकारों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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हरीश पांडे, काश्तकार देवनाई घाटी
नहर की मरम्मत करने के संबंध में कई बार सिंचाई विभाग के एई और जेई से कह दिया है। विभाग के अभियंता बंजर पड़ी नहर को देखने आज तक नहीं आये। जन प्रतिनिधि भी काश्तकारों की जायज मांग को गंभीरता से नहीं ले रहे है।
अनिल सिंह, काश्तकार, देवनाई
रिठाड नहर के हेड के निर्माण के दौरान देवनाई घाटी के काश्तकारों ने सिंचाई विभाग के अभियंताओं से लापरवाही न बरतने को कह दिया था।नहर का हैड ऊंचा होने से नहर में पानी नहीं चढ़ पा रहा है। नहर के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग होने से नहर जगह जगह पर पानी का रिसाव हो रहा है।
खड़क सिंह, देवनाई
क्षतिग्रस्त नहीं की मरम्मत और नहर को विभाग एक माह के अंदर दुुरुस्त नहीं करेगा तो काश्तकार 150 नाली जमीन में इस बार धान की रोपाई नहीं कर पायेंगे। नहर का घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदार और जेई के खिलाफ प्रशासन को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। लक्ष्मण सिंह काश्तकार
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