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भारत में लोगों के बीच संवाद का सबसे बेहतर माध्यम है हिंदी

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एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के शिक्षा संकाय विभाग में हुई भाषण प्रतियोगिता में शामिल हुए बीएड-एमएड के ? - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। हिंदी विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। यह हमारे पारंपरिक ज्ञान, प्राचीन सभ्यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु भी है। एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ देश की पहचान है बल्कि यह हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति, संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक भी है। हिंदी सरल, सहज, सुगम भाषा है। भाषा वही जीवित रहती है जिसका प्रयोग जनता करती है।
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हिंदी पर ये विचार बीएड-एमएड की छात्र-छात्राओं ने व्यक्त किए। ये विद्यार्थी अमर उजाला फाउंडेशन के हिंदी हैं हम अभियान के तहत सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के एसएसजे परिसर के शिक्षा संकाय में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदी भाषा की उपयोगिता विषय पर हुई भाषण प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रहे थे।
बीएड संकाय में चित्रेश त्रिपाठी, शैलजा कार्की, भावना नगदली क्रमश: प्रथम, द्वितीय, तृतीय रहे। एमएड संकाय की प्रतियोगिता में पूजा जोशी, प्रांजलि भट्ट, विनोद कुमार आर्या ने क्रमश: पहला, दूसरा, तीसरा स्थान प्राप्त किया।
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शिक्षा संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्ष प्रो. विजया रानी ढौंडियाल ने प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान पर रहे छात्र-छात्राओं को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने हिंदी को बचाने के लिए अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
निर्णायक मंडल में प्रो. भीमा मनराल डॉ. रिजवाना सिद्दीकी रहे। डॉ. संगीता पवार, डॉ. नीलम. डॉ. देवेंद्र चम्याल आदि ने भी कार्यक्रम में सहयोग किया। छात्रा अनीता पांडे, किरन, विजय, मंदीप, धना कार्की, सुनीता डसीला, पूजा जोशी, मनीष रावत, रमेश चंद्र, कमल चंद्र, पंकज जनौटी ने भी हिंदी की उपयोगिता को लेकर अपने विचार रखे।
वैश्वीकरण के दौर में हिंदी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकें बड़े पैमाने पर हिंदी में लिखी जा रही हैं। सोशल मीडिया और संचार माध्यमों में हिंदी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है।
- चित्रेश त्रिपाठी, बीएड द्वितीय सेमेस्टर
हिंदी व्यवहार की भाषा बन चुकी है। आज 90 प्रतिशत लोग हिंदी भाषा को समझते और बोलते हैं। भारत को गांवों का देश कहा जाता है। गांव में अधिकांश लोग हिंदी भाषा ही बोलते हैं। ऐसे में हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है।
- शैलजा कार्की, बीएड द्वितीय सेमेस्टर
जन्म के बाद बच्चा हिंदी भाषा का ही पहला अक्षर सीखता है। हिंदी ही हमारी पहचान है। हिंदी हमारी मातृभाषा है और यह भाषा कई रोजगार भी समेटे है। वर्तमान समय में हिंदी ने काफी तरक्की कर ली है, जो एक अच्छा संकेत है।
- भावना नगदली बीएड द्वितीय सेमेस्टर
जिस तरह हम अपनी भारत माता का सम्मान करते हैं उसी तरह हिंदी को भी सम्मान देने की जरूरत है। आज कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं हैं जहां हिंदी अपनी चमक नहीं बिखेर रही है। हर जगह हिंदी का प्रयोग बढ़ रहा है।
- पूजा जोशी, एमएड द्वितीय सेमेस्टर
बदलते परिवेश में हिंदी भाषा अपनी एक अलग पहचान बना रही है। लोगों ने अंग्रेजी भाषा को अपना स्टेटस बना लिया है इसके बावजूद संवाद की बेहतर भाषा हिंदी है। प्राथमिक स्कूलों व विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा को बढ़ावा मिल रहा है।
- प्रांजलि भट्ट, एमएड द्वितीय सेमेस्टर
अब सोशल मीडिया में भी हिंदी का वर्चस्व बढ़ा है। ब्लाग हो या वेबसाइट हर जगह हिंदी की धमक है। हिंदी हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। हिंदी सीखने वाले लोगों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है।
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- विनोद कुमार आर्या एमएड द्वितीय सेमेस्टर
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