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ओमिक्रॉन से लड़ने के लिए उपकरण पूरे, डॉक्टर और तकनीशियन के पद अधूरे

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अल्मोड़ा जिला अस्पताल में रखी गई ऑक्सीजन सिलेंडर - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। जिले में कोरोना के नये स्वरूप ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य महकमा अधिक सतर्क हो गया है। किसी भी हाल में संक्रमण को फैलने से रोका जाए इसकी पूरी तैयारी चल रही हैं। बेस अस्पताल (मेडिकल कॉलेज) की करें तो वहां पर कोरोना के नए वेरिएंट से लड़ने के लिए उपकरणों का इंतजाम तो पूरा किया गया है लेकिन डॉक्टर और तकनीशियनों का बड़ा अभाव है। ऐसे में अगर जिले में केस बढ़े तो दिक्कत आ सकती है। हालांकि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कहा है कि उनकी ओर से अस्पताल में तैनात सभी कर्मचारियों को उपकरणों की बारीकियां बताई गई हैं। आपातकालीन स्थिति में दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग कोरोना के नये स्वरूप ओमिक्रॉन (तीसरी लहर) को लेकर अलर्ट मोड पर है। उसका दावा है कि जिले में संक्रमण की स्थिति को हर हाल में काबू किया जाएगा। इसके अलावा लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है और वैक्सीनेशन की रफ्तार भी बढ़ा दी गई है। गांव-गांव में स्वास्थ्य कर्मी कैंप लगाकर और घर जाकर टीकाकरण कर रहे हैं। जल्द ही शत-प्रतिशत टीकाकरण की उम्मीद है।
बेस अस्पताल में हैं 50 वेंटिलेटर
अल्मोड़ा। कोरोना की तीसरी संभावित लहर से लड़ने के लिए बेस अस्पताल (मेडिकल कॉलेज) में 50 वेंटिलेटर रखे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इन 50 वेंटिलेटर को चलाने के लिए अस्पताल स्टॉफ को भी प्रशिक्षित किया गया है। ताकि आपातकालीन स्थिति में किसी को रेफर ना करना पड़े।
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बच्चों के लिए एनआईसीयू की सुविधा
अल्मोड़ा। बेस अस्पताल में बच्चों के लिए नियोनेटल इंटेेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) की व्यवस्था की गई है। प्राचार्य का कहना है कि यदि किसी बच्चे को जरूरत पड़े तो उसे रेफर नहीं किया जाएगा। हालत गंभीर होने पर ही रेफर करने के बारे में सोचा जाएगा। फिलहाल सभी तैयारियां की जा रही हैं। हफ्ते भर के अंदर महकमा पूरी तरह से ओमिक्रॉन से लड़ने को तैयार होगा। संवाद
जरूरत पड़ी तो बेस अस्पताल को बनाया जाएगा कोविड वार्ड
अल्मोड़ा। अगर जिले में कोरोना के केस बढ़ते हैं तो बेस अस्पताल को कोविड वार्ड में तब्दील कर दिया जाएगा। जगह की कमी नहीं है पर्याप्त कमरे भी हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों से एक बार फिर अपील की गई है कि वह अब पूरी तरह से जागरूकता दिखाएं मास्क पहनें और जो दो गज दूरी का पालन करें।
डॉक्टरों का अभाव लंबे समय से चल रहा है। पर्याप्त डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। हालांकि उनकी ओर से शासन को इस बात की जानकारी दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही यहां पर डॉक्टरों का अभाव दूर होगा। अभी बेस अस्पताल मेडिकल कॉलेज में 42 डॉक्टर तैनात हैं जरूरत 52 से ज्यादा की है।
-डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
सोमेश्वर में डाक्टर पूरे, वेंटिलेटर नहीं
सोमेश्वर। कोरोना से लड़ने के लिए सोमेश्वर के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) में डॉक्टर पूरे हैं लेकिन वेंटिलेटर का अभाव है। अस्पताल की व्यवस्था ठीक होने के कारण यहां कोविड वार्ड बनाने की व्यवस्था भी है। एक ऑक्सीजन प्लांट भी अस्पताल में लगा है। जो 15 बेड में ऑक्सीजन की सप्लाई कर सकता है। कोविड मरीजों को अगर आपातकाल में वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी तो समस्या खड़ी हो सकती है।
रानीखेत में आईसीयू वार्ड के लिए नहीं डॉक्टर
रानीखेत। कोरोना का खतरा बढ़ने पर उपमंडल क्षेत्र के सबसे बड़े राजकीय अस्पताल में व्यवस्थाएं पर्याप्त हैं। लेकिन चार बेड के आईसीयू वार्ड में चार डॉक्टरों और चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं हो सकी है। हालांकि अन्य डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया है। बच्चों के लिए ऑक्सीजनयुक्त 10 बेड सुरक्षित रखे गए हैं। अस्पताल अधीक्षक डॉ केके पांडेय ने बताया कि 500 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) का ऑक्सीजन प्लांट चल रहा है। खतरा अधिक होने की स्थिति में 70 ऑक्सीजन युक्त बेड बनाने की सुविधा भी है। अस्पताल में टीकाकरण की व्यवस्था होने के साथ ही घर-घर टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा हैै।
द्वाराहाट में जल्द लग जाएगा ऑक्सीजन प्लांट
द्वाराहाट। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) द्वाराहाट में कोरोना से लड़ने के लिए स्थिति कुछ हद तक सुधरी है। बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना अंतिम चरण में है। यहां 22 वार्ड बनाए गए हैं। अस्पताल में बाल और स्त्री रोग आदि विशेषज्ञ नहीं होने से वेंटिलेटर आदि की व्यवस्था नहीं है। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रवि शंकर ने बताया कि टीकाकरण का कार्य भी तेजी से चल रहा है।
भतरौंजखान में चार बेड, चार डॉक्टर
भतरौजखान। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भतरौंजखान में चार डाक्टर सहित कुल बारह लोग कार्यरत हैं। यहां पर मात्र चार बेड ही हैं। जबकि इस स्वास्थ्य केंद्र पर करीब एक दर्जन से अधिक गांव के लोग निर्भर हैं। ऐसे में यदि कोरोना की तीसरी लहर आती है तो स्थिति काफी भयावह हो सकती है। स्वास्थ्य केंद्र में 108 एंबुलेंस की व्यवस्था है लेकिन इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए यह नाकाफी है। क्षेत्र में टीकाकरण का कार्य संतोषजनक है। अब तक 7500 लोगों को दोनों टीके लग चुके हैं। कोरोना के केस बढ़ने पर स्वास्थ्य केंद्र में अतिरिक्त वार्ड बनाना संभव नहीं है।
भिकियासैंण सीएचसी के अलावा कहीं नहीं वेंटिलेटर
भिकियासैंण। ब्लॉक के अस्पतालों में से पीपीपी मोड पर चल रहे सीएचसी भिकियासैंण में डॉक्टरों की तैनाती है। जबकि तीन अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और चार एलोपैथिक चिकित्सालयों में कहीं पर एलोपैथी तो कहीं पर आयुर्वेदिक डाक्टरों के भरोसे स्वास्थ्य का जिम्मा है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. पीयूष रंजन ने बताया कि सीएचसी भिकियासैंण, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्यालकोट, विनायक, भतरौंजखान, राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय पाली, उत्तमछाड़ी, बाजन में ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। जबकि सिनौड़ा में इसकी व्यवस्था नहीं है। सीएचसी भिकियासैंण के अलावा किसी भी अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध नहीं है।
चौखुटिया में नहीं वेंटिलेटर, आईसीयू
चौखुटिया। चौखुटिया ब्लॉक में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर हैं। ब्लाक में तीन नए डॉक्टरों की तैनाती के बाद चिकित्सकों की संख्या 11 हो गई है। सीएचसी में सात डॉक्टर तैनात हैं। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अमित रतन ने बताया कि बच्चों के लिए 12 बेड बनाए गए हैं। जिनकी देखरेख के लिए अलग से चार स्टॉफ नर्स की तैनाती की जा रही है। वेंटिलेटर व आईसीयू की कोई व्यवस्था नही है। पहली डोज 96 प्रतिशत और दूसरी डोज कुल लक्ष्य का 79 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। सेना के सहयोग से डांक बंगला परिसर में बनाए गए दस बैड के कोविड केयर सेंटर में प्रत्येक बेड में ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर है। इसमें ऑक्सीजन की व्यवस्था है।
धौलछीना में नहीं है वेंटिलेटर
धौलछीना। यहां अस्पताल में एंबुलेंस और ऑक्सीजन कन्सनट्रेटर और ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था है। बेड भी पर्याप्त मात्रा में हैं। वेंटिलेटर की व्यवस्था यहां नहीं है। प्रशासन का कहना है कि वेंटिलेटर संचालित करने के लिए डॉक्टर और स्टाफ की व्यवस्था नहीं है।
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