अल्मोड़ा जेल में बंद अंडरवर्ल्ड डॉन प्रकाश पांडे उर्फ पीपी को संत का चोला पहनाने, जूना अखाड़े में शामिल करने और कई आध्यात्मिक संपत्तियों का उत्तराधिकारी बनाने जैसी सारी कवायद कहीं उसे पैरोल दिलाने के लिए तो नहीं की जा रही, इस पर सवाल उठने लगे हैं। पूरे प्रकरण में नेताओं से लेकर अधिकारी और कुछ संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह चर्चा प्रशासनिक और पुलिस महकमे में तेजी से चल रही है। मामले में शासन ने भी जांच बैठा दी है।
पांच सितंबर को प्रकाश पांडे उर्फ पीपी को जेल में दीक्षा दिए जाने के जूना अखाड़े के कुछ संतों के दावे के बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर इस पूरे प्रकरण के पीछे पीपी और उसके सलाहकारों की मंशा क्या है।
खासतौर पर, प्रशासनिक हल्कों में यह चर्चा आम है कि कहीं पीपी को पैरोल पर बाहर लाने के लिए तो संतई चोले का सहारा नहीं लिया जा रहा है। संत समाज से जुड़े एक शख्स का दावा है कि पीपी की छवि को सुधरा हुआ दिखाकर पैरोल दिलाने के प्रयास की प्रबल संभावना लग रही है क्योंकि इस आधार पर पूर्व में कई आरोपी लाभ उठाते रहे हैं। इन चर्चाओं के बीच पुलिस का खुफिया तंत्र इस पूरे प्रकरण में पराेक्ष और अपरोक्ष रूप से जुड़े लोगों पर पैनी नजर रख रहा है।
हिंदू संगठन का नेता रडार पर
सूत्रों ने बताया कि इस पूरे मामले में जेल में पीपी से मिलने आए संत तो जांच के दायरे में हैं ही, हिंदू संगठन का एक नेता भी पुलिस के रडार पर है। बताया गया कि नेता ने ही पांच सितंबर को जेल के अंदर संतों को ले जाने और फिर पत्रकारवार्ता कराकर प्रचार-प्रसार कराने का तानाबाना बुना था। इस नेता पर भी पुलिस की नजरें हैं। उसे जांच के लिए बुलाया जा सकता है।
जल्द अल्मोड़ा जेल आएंगे जांच अधिकारी
जेल प्रशासन हर जांच के लिए तैयार