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कल तक अपनी पार्टी का गुणगान टिकट कटा तो पार्टी के दोषों का बखान

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अल्मोड़ा में चाय की एक दुकान में चाय की चुस्कियों के बीच राजनीति पर चर्चा करते लोग - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। धूप खिलने से मौसम सुहावना होने के साथ ही चाय के नुक्कड़ों पर राजनीतिक बहसें बदस्तूर जारी हैं। चाय की चुस्कियों के बीच लोग राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा कर रहे हैं। चाय पीने के दौरान लोग यह कहते हुए सुने गए कि टिकट वितरण में हुए खेल से राजनीति का खेल न बिगड़ जाए। कल तक जो नेता अपनी पार्टी का गुणगान कर रहे थे वही नेता आज उसी पार्टी पर आरोप और प्रत्यारोप लगा रहे हैं। नेताओं की जुबान मौसम की तरह बदल रही है।
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शनिवार दोपहर नगर के टैक्सी स्टैंड के पास एक चाय की दुकान पर कुछ लोग चाय पीते-पीते बतिया रहे थे। एक सज्जन कहने लगे टिकट वितरण में हुए खेल से अब राजनीति का खेल भी रोमांचकारी हो रहा है। टिकट वितरण से पहले नेता अपनी पार्टी का गुणगान कर रहे थे। दावेदार का टिकट क्या कटा वे अपनी पार्टी पर ही आरोप और प्रत्यारोप लगा रहे हैं। नेताओं के बगावती सुर से राजनीति का मैच देखने लायक होगा। इतने में एक दूसरे सज्जन ने कहा कि चुनाव के मौसम में नेताओं को भी गांव और नेताओं की यादें आ जा जाती है। पांच साल में भले ही नेताजी गांव न पहुंचे हो लेकिन चुनाव प्रचार के गांव के घर-घर के दरवाजे पर दस्तक देकर लोगों से आशीर्वाद मांग रहे हैं। अभी वह आगे कुछ और बोलना चाह रहे थे कि इतने में तीसरे व्यक्ति कहने लगे दाज्यू पांच सालों में जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान तक नहीं हुआ। किसी गांव में पानी, बिजली नहीं हैं तो कहीं स्कूलों में शिक्षक तक नहीं है। ऐसे में ये नेताजी किस विकास की बात कह रहे हैं। कल तक जो नेता अपनी पार्टी का गुणगान कर रहे थे वहीं नेता आज पार्टी के अवगुण गिना रहे हैं। वहां बैठे मनोज ने कहा कि बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। इस पर आदित्य कहने लगे नेता पांच सालों में रोजगार के नाम पर राजनीति करते रहे लेकिन बेरोजगारों के साथ अब भी खाली है। उमेद कहने लगे गांव में जंगली जानवरों ने खेती बर्बाद कर दी लेकिन नेताओं को इससे कोई सरोकार नहीं हैं।
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