हरीश रावत के स्टिंग के बाद अब उत्तराखंड में फोन टैपिंग का मामला गर्माया है। भाजपा ने इस मामले को उठाया है और अब इसकी जांच की मांग की है। लेकिन भाजपा की ओर से उठाए गए फोन टैपिंग के मामले को फिलहाल कोई जांच न होने के संकेत मिले हैं। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर नेताओं और अन्य महत्वपूर्ण लोगों के फोन टैपिंग का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी।
मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने इस मामले में स्पष्ट तो कुछ नहीं कहा, पर इतना जरूर कहा कि इस तरह का कोई मामला विचाराधीन नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग का मामला सामने आने के बाद भाजपा ने इस मामले को उठाया था। दिल्ली में 26 मार्च को स्टिंग की सीडी कांग्रेस के बागी विधायकों ने जारी की थी।
इसके बाद 27 मार्च को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा। इस पर कांग्रेस का सीधा आरोप था कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगाने जैसे गंभीर मामले में सीडी जैसे हल्के मामले को आधार बनाया।
मुख्य सचिव कहा, मामले में कोई जांच विचाराधीन नहीं
अब कांग्रेस राष्ट्रपति शासन को कोर्ट में चुनौती दे चुकी है। दूसरी ओर सीडी प्रकरण भी कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। इस स्थिति में भाजपा ने अब फोन टैपिंग का मसला उठाया था।
भाजपा के प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने बाकायदा प्रेसवार्ता कर पूर्व कांग्रेस सरकार पर महत्वपूर्ण नेताओं के फोन टैप करने का आरोप जड़ा था। मुन्ना ने इस मामले की जांच की मांग राज्यपाल से भी की थी। शनिवार को मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई जांच विचाराधीन नहीं है।