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Year Ender 2023: एनसीआर में रहने का सपना हुआ पूरा, प्रदेश को मिला दूसरा नोएडा; CM योगी ने किए ये बड़े एलान

Sat, 23 Dec 2023 06:31 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, उत्तर प्रदेश

सार

साल 2023 अब खत्म होने वाला है और 2024 आने वाला है। योगी सरकार ने साल 2023 में कई योजनाओं का एलान किया और इस वर्ष कई योजनाएं पूरी भी हुईं। आइए 2023 में सरकार के कुछ बड़े एलान और योजनाओं के बारे में जानते हैं। 
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योगी सरकार में किए गए एलान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Year Ender 2023: साल 2023 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की कई बड़ी उपलब्धियां देखने को मिलीं। सरकार ने कई योजनाओं की शुरुआत की साथ ही कई योजनाओं की घोषणा की है। इन योजनाओं से आने वाले समय में लोगों को कई सहूलियतें मिलेंगी। साल 2023 अब खत्म होने वाला है, ऐसे में आइए यूपी की पांच बड़ी योजनाओं के बारे में जानते हैं। 

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1. नोएडा बनने के 47 साल बाद प्रदेश को मिला एक और औद्योगिक शहर
नोएडा के गठन के 47 वर्ष बाद प्रदेश को एक और नए औद्योगिक शहर की सौगात प्रदेश सरकार ने दी है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के नाम से नया औद्योगिक शहर झांसी-ग्वालियर मार्ग बसाया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। खास बात ये है कि बीडा का आकार नोएडा से भी बड़ा होगा। नोएडा का गठन 13 हजार हेक्टेयर जमीन से किया गया था। बीडा का गठन करीब 14 हजार हेक्टेयर जमीन से किया जा रहा है। बीडा के लिए सरकार पहले चरण में 5000 करोड़ रुपये की राशि देगी।

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण व नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत झांसी में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) द्वारा नोएडा की तर्ज पर एक नए इंडस्ट्रियल टाउनशिप को विकसित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई है। परियोजना के पहले चरण में झांसी के 33 राजस्व ग्रामों की 35 हजार एकड़ जमीन को अधिग्रहीत कर औद्योगिक शहर की स्थापना की जाएगी। इस जमीन की कीमत 6312 करोड़ रुपये है।
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2. एनसीआर के 2.40 लाख फ्लैट आवंटियों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ
नोएडा-एनसीआर के 2.40 लाख फ्लैट आवंटियों की न केवल रजिस्ट्री होगी बल्कि बिल्डर की लापरवाही की वजह से प्राधिकरणों द्वारा लगाई गई पेनाल्टी भी माफ होगी। इसके अलावा वाजिब कारणों से प्रोजेक्ट में होने वाली देरी के दंश से बिल्डरों को भी कुछ राहत दी गई है। इस फैसले से केवल यूपी के ही लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये के रीयल इस्टेट प्रोजेक्ट्स की राह की बाधाएं खत्म होंगी।

देशभर के 4.12 लाख अटके आवास में से 2.40 लाख घर केवल नोएडा एनसीआर में स्थित हैं। इनमें से अधिकांश आवास बिल्डरों की खस्ता हालत की वजह से पूरे नहीं हो पा रहे हैं। समिति की संस्तुतियों को कैबिनेट मंजूरी के बाद एक तरफ घर खरीदारों के हितों की रक्षा होगी तो दूसरी तरफ रुकी परियोजनाओं को समय से तैयार कर खरीदारों को समय से फ्लैट मिलेंगे। उन्होंने कहा कि सिफारिशों की मंजूरी से क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

3. अधिवक्ता कल्याण निधि के प्रस्ताव को बढ़ाने की मिली मंजूरी
प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में अधिवक्ता कल्याण निधि (कार्पस फंड) को 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में अधिवक्ताओं की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। प्रदेश सरकार ने अपने संकल्प पत्र की घोषणा के तहत अधिवक्ताओं की मृत्यु पर उनके परिजन को मिलने वाली सहायता राशि की आयु सीमा को भी बढ़ाकर 70 वर्ष किया है। उन्होंने बताया कि 500 करोड़ रुपये के कापर्स फंड के ब्याज से ही सहायता राशि दी जाएगी।

4. आगरा में बनेगा अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र का रीजनल सेंटर
आगरा के राजकीय प्रक्षेत्र सींगना में पेरू के अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र का रीजनल सेंटर बनेगा। यहां आलू के उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शोध होगा। सेंटर के लिए प्रक्षेत्र की 10 हेक्टेयर जमीन 99 वर्ष के लीज पर दी जाएगी। उद्यान विभाग और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड गुरुग्राम हरियाणा के बीच होने वाली लीज डीड पर देय 37.50 लाख के स्टांप शुल्क और 7.50 लाख के निबंधन शुल्क में छूट दी जाएगी। इस प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई। 

रीजनल सेंटर के लिए सींगना स्थित उद्यान विभाग की 138.50 हेक्टेयर में से करीब 10 हेक्टेयर जमीन कृषि एवं किसान कल्याण, उद्यान प्रभाग के नियंत्रणाधीन स्वशासी निकाय राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड गुरुग्राम हरियाणा को दी जाएगी। इस सेंटर के बनने से न सिर्फ आलू के दुर्लभ किस्म के बीज मिल सकेंगे, बल्कि देश के बाहर भी आलू निर्यात करने का रास्ता आसान होगा। इससे किसानों को उपज का अच्छा दाम मिलेगा। यूपी में करीब 8 लाख हेक्टेयर में हर साल लगभग 160 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा होता है।

5. हरदुआगंज तापीय परियोजना की बढ़ी लागत को मंजूरी
हरदुआगंज की 660 मेगावाट की तापीय परियोजना की लागत बढ़ गई है। अब इसकी पुनरीक्षित लागत 6352.14 करोड़ रुपया हो गई है। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी गई है। हरदुआगंज तापीय परियोजना पहले अनुमोदित लागत 6011.83 करोड़ थी। अब इसमें 273.15 करोड़ की ब्याज की वृद्धि, स्टार्ट ऑफ फ्यूल पावर एनर्जी में 62.66 करोड़ की वृद्धि एवं एफजीडी सिस्टम के लिए लाइमस्टोन एवं अमोनिया की लागत से 4.50 करोड़ की वृद्धि हो गई है। इस तरह कुल 340.31 करोड़ की वृद्धि हुई है। ऐसे में परियोजना की तृतीय पुनरीक्षित लागत 6352.14 करोड़ रुपये हो गई है। इस परियोजना की कुल लागत का 70 फीसदी विस्तीय संस्थानों से स्वीकृत ऋण द्वारा और 30 फीसदी भाग शासकीय पूंजी द्वारा पोषित किया जा चुका है।

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