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वक्फ संशोधन बिल: कारी शफीकुर्रहमान बोले- शाहीन बाग जैसे आंदोलन के लिए तैयार... जानें मेरठ शहर काजी का भी रुख

Fri, 04 Apr 2025 10:34 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

मेरठ में जुमे की नमाज से पहले खिताब फरमाते हुए कारी शफीकुर्रहमान ने वक्फ संशोधन बिल को काला कानून बताया और पुरजोर विरोध करने की बात कही। वहीं शहर काजी डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी ने कहा कि इस बिल से कब्रिस्तानों को लेकर भी विवाद पैदा होगा।
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शाही जामा मस्जिद से नमाज पढ़कर निकलते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शाही जामा मस्जिद में जुमे की नमाज से पहले खिताब करते हुए मौलाना कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने कहा कि रमजान के बाद यह पहला जुमा है। हम नेक काम करके फारिग हुए हैं। अल्लाह हम से राजी है, इसलिए अल्लाह से मांगो, उस से अपना रिश्ता मजबूत करो। आज दुनिया में कोई हमारा हामी और मदद करने वाला नहीं है। फलस्तीन पर हो रहे जुल्म को पूरी दुनिया तमाशा बनकर देख रही है। इसी तरह हिंदुस्तान में भी मुसलमान इस वक्त बेबस हैं। वक्फ संशोधन बिल पास हुआ है। देश याद रखेगा कि एक काले कानून को पास करने लिए आधी रात तक संसद को चलाया गया। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं।
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नमाज के दौरान तैनात पुलिस फोर्स। - फोटो : अमर उजाला
कारी शफीकुर्रहमान ने कहा कि हमें यह बिल हरगिज बर्दाश्त नहीं है। यह मुसलमानों की प्रॉपर्टी को हथियाने की नापाक कोशिश है। सेकुलर का नाम जपने वाली आरएलडी, टीडीपी, जदयू आदि ने संविधान और माइनॉरिटी के खिलाफ जाकर सरकार का साथ दिया है। हम हर तरह आंदोलन के लिए तैयार हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा ए हिंद इस सिलसिले में जो भी गाइडलाइन देंगी, हम कानून के दायरे में रहते हुए हिस्सा लेंगे, चाहे जेल भरो आंदोलन हो, या जंतर-मंतर पर धरना। चाहे शाहीन बाग जैसा आंदोलन हो।
 

कारी शफीकुर्रहमान। - फोटो : अमर उजाला
कारी शफीकुर्रहमान ने कहा कि बगैर अरकान सीखे हज पर जाने से हज अदा नहीं होगा, इसलिए हज के अरकान सीखना जरूरी है। इसके लिए ट्रेनिंग कैंप आगामी पीर (सोमवार) के दिन से इशा की नमाज के बाद रोजाना मस्जिद खदीजा, करीमनगर, हापुड़ रोड में चलेगा।
 
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शहर काजी डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला

शहर काजी बोले, इस बिल से मुसलमानों को होगी परेशानी

शहर काजी डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी ने जामा मस्जिद में लोगों को बताया कि वक्फ बिल का क्यों विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो मुस्लिम तंजीमों से सुझाव मांगे गए थे, उनको इस बिल में नहीं माना गया है। इसमें सरकार गैर मुसलमानों को भी शामिल कर रही है। कुछ कब्रिस्तान ऐसे हैं, जो वक्फ में दर्ज नहीं किए गए हैं, क्योंकि वक्फ में दर्ज करने की प्रक्रिया बड़ी लंबी है और इसका दफ्तर सिर्फ लखनऊ में है। वहां फाइलों का अंबार है। ऐसे में नए बिल पर कानून बन जाने पर इस तरह के कब्रिस्तानों पर विवाद हो सकता है। इससे मुसलमानों को परेशानी होगी, इसलिए वह इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध का दिल्ली में रोड मैप तैयार किया जा रहा है, उसी के आधार पर आगे काम किया जाएगा।

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