नमाज के दौरान तैनात पुलिस फोर्स।
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कारी शफीकुर्रहमान ने कहा कि हमें यह बिल हरगिज बर्दाश्त नहीं है। यह मुसलमानों की प्रॉपर्टी को हथियाने की नापाक कोशिश है। सेकुलर का नाम जपने वाली आरएलडी, टीडीपी, जदयू आदि ने संविधान और माइनॉरिटी के खिलाफ जाकर सरकार का साथ दिया है। हम हर तरह आंदोलन के लिए तैयार हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा ए हिंद इस सिलसिले में जो भी गाइडलाइन देंगी, हम कानून के दायरे में रहते हुए हिस्सा लेंगे, चाहे जेल भरो आंदोलन हो, या जंतर-मंतर पर धरना। चाहे शाहीन बाग जैसा आंदोलन हो।
कारी शफीकुर्रहमान ने कहा कि बगैर अरकान सीखे हज पर जाने से हज अदा नहीं होगा, इसलिए हज के अरकान सीखना जरूरी है। इसके लिए ट्रेनिंग कैंप आगामी पीर (सोमवार) के दिन से इशा की नमाज के बाद रोजाना मस्जिद खदीजा, करीमनगर, हापुड़ रोड में चलेगा।
शहर काजी डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी
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शहर काजी बोले, इस बिल से मुसलमानों को होगी परेशानी
शहर काजी डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी ने जामा मस्जिद में लोगों को बताया कि वक्फ बिल का क्यों विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो मुस्लिम तंजीमों से सुझाव मांगे गए थे, उनको इस बिल में नहीं माना गया है। इसमें सरकार गैर मुसलमानों को भी शामिल कर रही है। कुछ कब्रिस्तान ऐसे हैं, जो वक्फ में दर्ज नहीं किए गए हैं, क्योंकि वक्फ में दर्ज करने की प्रक्रिया बड़ी लंबी है और इसका दफ्तर सिर्फ लखनऊ में है। वहां फाइलों का अंबार है। ऐसे में नए बिल पर कानून बन जाने पर इस तरह के कब्रिस्तानों पर विवाद हो सकता है। इससे मुसलमानों को परेशानी होगी, इसलिए वह इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध का दिल्ली में रोड मैप तैयार किया जा रहा है, उसी के आधार पर आगे काम किया जाएगा।
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