उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने चाहिए। यदि वे विशेष जांच दल के सामने पेश नहीं होते और सबूत नहीं देते हैं, तो उनकी बातें केवल डींगें मानी जाएंगी। आलोक कुमार ने उनकी ईमानदारी की कमी पर भी सवाल उठाया।
सर्वदलीय समिति का खंडन
आलोक कुमार ने राजनीतिक दलों की एक सर्वदलीय समिति से जांच के सुझाव को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इस सुझाव का मतलब जांच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष या राहुल गांधी को सौंपना है। उन्होंने याद दिलाया कि ये वही लोग हैं जिन्होंने कार सेवकों पर गोलियां चलवाई थीं।
आलोक कुमार ने सवाल किया कि क्या राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि आपराधिक मामलों की जांच कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कानून उन्हें यह अधिकार नहीं देता है। जनता को तभी विश्वास होगा जब निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय अधिकारी जांच के स्थापित तरीकों का उपयोग करेंगे।
अन्य ट्रस्टों की जांच की मांग
आलोक कुमार ने रामालया ट्रस्ट की भी जांच की मांग की। उन्होंने बताया कि इस ट्रस्ट ने विज्ञापन पट्ट लगाए थे कि वे सोने का मंदिर बनाएंगे। रामालया ट्रस्ट ने हर हिंदू से 10 ग्राम सोना दान करने को कहा था।
उन्होंने राम जन्मभूमि पुनरुत्थान ट्रस्ट की भी जांच करवाने को कहा। आलोक कुमार ने कहा कि इस ट्रस्ट ने मंदिर नहीं बनाया। उन्होंने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की भी जांच की मांग की। आलोक कुमार ने कहा कि जहां भी कोई दोषी हो, उसकी जिम्मेदारी तय कर उसे सजा मिलनी चाहिए। किसी के लिए कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।