सांसद सोनिया गांधी की महिला विश्वविद्यालय की घोषणा के एक साल बाद संसद में प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है, लेकिन विश्वविद्यालय के रास्ते में रोडे़ ही रोड़े हैं।
पहले पांच सौ एकड़ भूमि का रोड़ा था, जिसे कम करके तीन सौ एकड़ भूमि की आवश्यकता पर सहमति बन गई।
तीन सौ एकड़ भूमि में 60 प्रतिशत भूमि किसानों से ही लेनी है।
बाकी 40 प्रतिशत जमीन ग्राम पंचायत से ली जाएगी। डीएम अमित गुप्ता का कहना है कि महिला विवि के लिए शासन से निर्देश मिलने के बाद किसानों से वार्ता की जा रही है।
कई किसानों ने जमीन के बदले मुआवजे के साथ नौकरी की भी मांग की है। एसडीएम से रिपोर्ट आते ही उसे शासन को भेज दिया जाएगा।
ऐसा लग रहा है कि किसान जान चुके हैं कि वोट की राजनीति करने वाले नेताओं से अपने बात मनवाने का यह सुनहरा मौका है।
पार्टी के कुछ सूत्रों की मानें तो सोनिया के लिए यह यूनिवर्सिटी इतनी जरूरी है कि वह इसके लिए किसानों की मांग पूरी करने का कोई रास्ता निकाल सकती हैं।