इस पर अपने टेंडर बीट के शर्तों के अनुसार जेपी सीमेंट ने मुकदमा लड़ कर धारा चार से उक्त खनन क्षेत्र को अलग करा दियाल। लेकिन बाद में एनजीटी के आदेश से उस भूमि को फिर वन भूमि घोषित कर दिया गया। जब जेपी सीमेंट ने यूपी सरकार से टेंडर के अनुसार भूमि की मांग की तो सरकार ने जेपी सीमेंट के खनन खेत्र के लिए वन भूमि 586.178 हेक्टेयर की अधिसूचना निरस्त कर 470.304 हेक्टेयर गैर वन भूमि कृषि के लिए देने का निर्णय लिया है।
मंगलवार को यूपी सरकार की कैबिनेट में इसको लेकर फैसला लिया गया है। फैसले में सरकार ने कहा है कि मड़िहान से भूमि इसके लिए अधिकृत की जाएगी। जमीन का चार गुना मूल्य, पौध रोपण से आने वाला खर्च वहन करने के बाद फैक्ट्री शुरू हो सकेगी। अब यूपी सरकार के आदेश के बाद जेपी सीमेंट एसोसिएट को भारत सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही खनन की अनुमति मिल सकेगी।