बलिया से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद वह इलाहाबाद पहुंचे। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक कला वर्ग में प्रवेश लिया। वह हिन्दू हॉस्टल में रहते थे। स्नातक की शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही वह छात्र राजनीति से जुड़े।
छात्रों के लिए लड़ी लंबी लड़ाई
छात्रों के मुद्दे पर उन्होंने कई आंदोलन छेड़े। वर्ष 1967 से उनका राजनैतिक सफर शुरू हुआ। वह जेल में थे, तभी लोकसभा का चुनाव की रणभेरी बज गई। समाजवादी नेता छुन्नन गुरू व सालिगराम जायसवाल के अनुरोध पर वह फूलपुर से विजयलक्ष्मी पंडित के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे। लोकसभा चुनाव के सात दिन पहले उन्हें जेल से रिहा किया गया।
हालांकि अपने पहले चुनाव में जनेश्वर को शिकस्त का सामना करना पड़ा था। विजय लक्ष्मी पंडित के राजदूत बनने के बाद फूलपुर सीट पर वर्ष 1969 में उपचुनाव हुआ तो जनेश्वर मिश्र सोशलिस्ट पार्टी से मैदान में उतरे और जीते। लोकसभा में पहली बार वह पहुंचे तो प्रख्यात समाजवादी नेता राजनारायण ने जनेश्वर मिश्र को छोटे लोहिया का नाम दिया।
छोटे लोहिया का राजनीतिक सफर
जनेश्वर मिश्र ने वर्ष 1972 के चुनाव में कमला बहुगुणा को और वर्ष 1974 में इंदिरा गांधी के अधिवक्ता रहे सतीश चंद्र खरे को हराया। वर्ष 1977 में वह वीपी सिंह को इलाहाबाद सीट पर हराकर लोकसभा पहुंचे। मोरार जी देसाई सरकार में उनको शामिल किया गया और वह पेट्रोलियम, रसायन एवं उर्वरक मंत्री बने।
इसके बाद उन्होंने विद्युत, परंपरागत ऊर्जा और खनन मंत्रालय संभाला। चरण सिंह सरकार में वह जहाजरानी व परिवहन मंत्री बने। वह वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव लडे़ और दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा की पत्नी कमला बहुगुणा को पराजित कर दिया।
विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में वह संचार मंत्री बने। वह वर्ष 1991 में चंद्रशेखर की सरकार में रेलमंत्री, एचडी देवगौड़ा की सरकार में जल संसाधन और इंद्र कुमार गुजराल की सरकार में पेट्रोलियम मंत्री बनाए गए। वह वर्ष 1992 से 2010 तक राज्यसभा के सदस्य रहे।
जीवन के आखिरी समय तक वह सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालने के बाद भी वह देश के उन गिने-चुने नेताओं में से थे, जिनके पास न तो निजी वाहन रहा और न कोई पास न तो कोई बंगला ही था। वह इलाहाबाद के कीडगंज मुहल्ले में एक किराये के मकान में ही रहते थे। यह उनके जमीन से जुड़े नेता होने की भी पहचान थी। 22 जनवरी 2010 में हार्ट अटैक की वजह से उनका इलाहाबाद में निधन हो गया था।