लक्सा के लक्ष्मीकुंड पर सोरहिया मेले की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। काशी के लक्खा मेले में शुमार 16 अंकों का खास महत्व है। मंदिर के महंत शिवप्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज ने बताया कि 22 सितंबर से सोरहिया का महाअनुष्ठान आरंभ होगा और जीवित्पुत्रिका व्रत तक चलेगा।
धन संपत्ति, ऐश्वर्य और संतान सुख की कामना से लक्ष्मीकुंड पर सजने वाला सोरहिया मेला शुक्रवार से आरंभ होगा। 22 सितंबर से छह अक्तूबर तक होने वाले आयोजन के दौरान लक्ष्मीकुंड स्थित मां लक्ष्मी के मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। बृहस्पतिवार को मंदिर परिक्षेत्र में मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। इस बार सोरहिया मेले की शुरुआत सौभाग्य योग में हो रही है जो श्रद्धालुओं पर कृपा बरसाएगा।
लक्सा के लक्ष्मीकुंड पर सोरहिया मेले की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। काशी के लक्खा मेले में शुमार 16 अंकों का खास महत्व है। मंदिर के महंत शिवप्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज ने बताया कि 22 सितंबर से सोरहिया का महाअनुष्ठान आरंभ होगा और जीवित्पुत्रिका व्रत तक चलेगा। 16 दिन के व्रत और पूजन में स्नान और 16 आचमन के बाद देवी विग्रह की 16 परिक्रमा की जाती है। माता को 16 चावल के दाने, 16 दूर्वा और 16 पल्लव अर्पित किए जाते हैं। व्रत के लिए 16 गांठ का धागा धारण किया जाता है। जो कथा सुनी जाती है, इसमें 16 शब्द होते हैं। 16वें दिन जीवित्पुत्रिका या ज्यूतिया के निर्जला व्रत के साथ पूजन का समापन होता है।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 22 सितंबर को दिन में 1:36 बजे आरंभ होगी जो कि 23 सितंबर को दिन में 12:18 बजे तक रहेगी। अष्टमी तिथि के दिन मूल नक्षत्र 22 सितंबर को 3:35 से 23 सितंबर को 2:56 तक रहेगा। इस दिन सौभाग्य योग का अनुपम सौभाग्य योग रहेगा। सौभाग्य योग 22 सितंबर को रात्रि 11:52 से 23 सितंबर को रात्रि 9:30 मिनट तक रहेगा।