फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेल में स्कूल: बनारस की जिला कारागार की 'पाठशाला' में बंदी तैयार कर रहे होनहार, चार साल की रूही बोलती है फर्राटेदार अंग्रेजी

Wed, 07 Jul 2021 12:22 PM IST
गीतार्जुन गौतम ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी जिला कारागार में 102 महिला बंदी बंद हैं। इनमें से अधिकतर पढ़ी लिखी हैं। साथ ही कला कौशल में भी पारंगत हैं। वहीं, कोई बच्चा अपनी मां तो कोई दादी के साथ सुबह और शाम जेल में लगने वाली पाठशाला में हाजिरी लगाता है।
विज्ञापन
वाराणसी जिला कारागार। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूं तो जेल का नाम सुनते ही हर किसी के जेहन में सबसे पहले दुर्दांत अपराधियों की तस्वीर सामने आती है, लेकिन वाराणसी का जिला कारागार में देश के भविष्य की नींव रखी जा रही है। चार साल की रूही (काल्पनिक नाम) ने जब से होश संभाला है, तब से उसने स्कूल का मुंह नहीं देखा, लेकिन उसकी फर्राटेदार अंग्रेजी का बड़े-बड़े लोहा मानते हैं। पांच साल का रोहन (काल्पनिक नाम) गणित में इतना तेज है कि बिना कैलकुलेटर उंगलियों पर कठिन हिसाब भी जोड़ लेता है।

विज्ञापन


ऐसे छह से सात बच्चे जो कभी जेल की चहारदीवारी से बाहर नहीं निकले, वह अपने ज्ञान से सभी का ध्यान खींच रहे हैं। यह सब संभव हो पाया है जिला कारागार में बंद महिला बंदियों की प्रतिभा से। जो इन छह से सात बच्चों की अलग से पाठशाला चला रही हैं। यहां 102 महिला बंदी बंद हैं। इनमें से अधिकतर पढ़ी लिखी हैं। साथ ही कला कौशल में भी पारंगत हैं। वहीं, कोई बच्चा अपनी मां तो कोई दादी के साथ सुबह और शाम जेल में लगने वाली पाठशाला में हाजिरी लगाता है। 

सता रही भविष्य की चिंता 
अबोध बच्चों को साथ लेकर जेल में परवरिश कर रही माता और दादी को मासूमों के भविष्य की भी चिंता है। दो साल पहले तक कुछ बच्चे बंदी रक्षकों के साथ बाहर प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने भी जाते थे, लेकिन कोरोना काल में स्कूल बंद होने से इन मासूमों को जेल के अंदर ही शिक्षा दी जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

कोई ग्रेजुएट तो कोई शिक्षक 
प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या के आरोप में बंद चौबेपुर निवासी महिला की तीन साल की बेटी भी उसके साथ है। महिला पोस्ट ग्रेजुएट है। वह अपनी बेटी को खुद पढ़ाती है। बच्ची को पढ़ते देख अन्य महिला बंदियों के बच्चे भी उस बैरक में पढ़ने पहुंचते हैं। फूलपुर थाना क्षेत्र की एक युवती अपनी भाभी की हत्या में आरोपी है, पहले वह किसी स्कूल में शिक्षक थी। अब वह अपना अनुभव जेल में बच्चों के साथ बांट रही है।

जेल से स्कूल जाती थी बच्ची
चंदौली की चकिया निवासी युवती शादी वाले दिन प्रेमी के साथ मिलकर पति की खंजर से हत्या के आरोप में पिछले आठ साल से बंद है। जेल में बेटी के जन्म के बाद जब वह पढ़ने लायक हुई तो उसका दाखिला नदेसर स्थित घौसाबाद प्राथमिक विद्यालय में कराया। उस समय बंदी रक्षक उसे स्कूल लेने और छोड़ने जाते थे। कोरोना काल में स्कूल बंद हुआ तो बेटी को उसके फूफा साथ ले गए।

जिला जेल चौकाघाट के जेलर पीके त्रिवेदी ने बताया कि जेल में इस समय कुल बारह बच्चे हैं, 102 महिला बंदियों में अधिकतर बंदी बच्चों को सुबह और शाम पढ़ा रही हैं। इनमें छह से सात बच्चे प्रतिभाशाली हैं। इन पर वह विशेष ध्यान दे रही हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें