बाढ़ का पानी उतरने के बाद शिविरों में रहने वाले लोगों को राहत तो मिली, लेकिन कई परिवारों के आशियाने जर्जर हो चुक हैं। वहां जाने की जगह कई परिवार टेंट लगाकर रहने को विवश हैं। कुछ ऐसा ही हाल ढेलवरिया के बड़ा देव मंदिर के पास है। वरुणा नदी के तटीय इलाके में बसे दर्जनों परिवारों के घर अब रहने लायक नहीं हैं। कई घर अब भी पानी और कीचड़ की चपेट में हैं।
नवयुग विद्या मंदिर में शिविर में चार परिवारों ने शरण ले रखी है। लोगों का कहना है कि बाढ़ के पानी से घर की दीवारें जर्जर हो गई हैं। घर में कीचड़ भरा हुआ है वहां जाना खतरे से खाली नहीं है। कई मकान अब भी पानी में हैं। छतों पर परिवार का एक सदस्य सामान की निगरानी करता है बाकी टेंट में रहते हैं।
गंगा और वरुणा का जलस्तर तेजी से घट रहा है। बाढ़ का पानी कम होने से लोग राहत महसूस कर रहे हैं। हालांकि, बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों के घरों में सिल्ट और गाद जमा होने से लोग उसी रास्ते बाहर जाने को मजबूर हैं। चिकित्सकों के मुताबिक ऐसे समय में चर्म रोग, डेंगू, मलेरिया के साथ ही पेट संबंधी बीमारियां होने की संभावना अधिक रहती है।
लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। गंगा में आई बाढ़ की वजह से कोनिया, राजघाट, अस्सी, लंका, सामनेघाट के साथ ही वरुणापार के कई इलाकों में लोगों के घर की पहली मंजिल पूरी तरह पानी में डूब गई थी। करीब सप्ताह भर तक घर छोड़कर लोग बाढ़ राहत शिविर में रहे। अब जब पानी कम हो गया तो लोग घरों को लौट रहे हैं। घर के पास पानी के साथ सिल्ट और गाद भी जमा है।
पेयजल का संकट लगातार बना हुआ है। गंदे पानी के बीच से गुजरने की वजह से लोगों के पैरों में खुजली, दाने की समस्या हो रही है। साथ ही मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की ओर से जल्द से जल्द कालोनियों के पास सफाई, दवा के छिड़काव का दावा किया जा रहा है। अगर जल्द समस्या दूर नहीं हुई तो परेशानी बढ़ सकती है।