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खूब बरसे वोट, फिर भी ‘आधी आबादी’ पीछे

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से एक दिन पहले विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने अपनी शक्ति तो दिखाई, लेकिन महिला प्रत्याशी कोई कमाल नहीं दिखा सकी। जीत तो छोड़िए, सपा से कैंट प्रत्याशी पूजा यादव को छोड़ किसी भी महिला प्रत्याशी की जमानत तक नहीं बची। 2022 के विधानसभा चुनाव में इस बार जिले में आठ महिला प्रत्याशी मैदान में थीं।
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2022 के विधानसभा चुनावों में अलग-अलग पार्टियों ने महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया था। सेवापुरी से कांग्रेस ने अंजू आनंद सिंह को टिकट दिया था। शिवपुर से आम जनता पार्टी (इंडिया) से ऊषा को टिकट दिया गया था। शहर उत्तरी से कांग्रेस ने गुलेरना तबस्सुम को मैदान में उतारा था। शहर दक्षिणी के विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने मुदिता कपूर को मैदान में उतारा था। कैंट से सपा से पूजा यादव को टिकट दिया था। रोहनिया में बहुजन मुक्ति पार्टी से उर्मिला देवी व आम आदमी पार्टी से पल्लवी वर्मा को टिकट मिला था। अजगरा से कांग्रेस से हेमा देवी को टिकट दिया था।
कृष्णा पटेल और आरती की भी जब्त हुई थी जमानत
2022 में कोई महिला प्रत्याशी चुनाव में जीत नहीं हासिल कर सकी। वहीं 2017 के चुनाव में रोहनिया से अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल की भी जमानत जब्त हो गई थी। इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनावों में एक मात्र महिला विधायक के तौर पर रोहनिया से अनुप्रिया पटेल चुनी गई थी। लेकिन इस बार ‘आधी आबादी’ नुमाइंदगी की दौड़ में कहीं टिक नहीं पाई।
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2017 में कम थीं महिलाएं
2017 के चुनाव में कृष्णा पटेल को छोड़ किसी प्रमुख पार्टी की ओर से कोई महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं थी। कुछ महिला प्रत्याशी छोटे दलों से या फिर निर्दल चुनाव मैदान में थीं। कृष्णा पटेल के बाद अजगरा से निर्दल लड़ी आरती ने भी अपनी जमानत जब्त होने से नहीं बचा सकी। बाकी महिला प्रत्याशियों को नाम मात्र के वोट मिले और सभी की जमानत जब्त हो गई थी।
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