शिकायत के मुताबिक, एग्रीमेंट में यह भी तय किया गया था कि निर्धारित समय में फ्लैट नहीं मिलने पर बिल्डर दोनों की रकम ब्याज समेत वापस करेगा। तय समय बीतने के बाद भी फ्लैट तैयार नहीं हुए। शिकायतकर्ता के अनुसार, द्वितीय तल पर बुक किए गए दोनों फ्लैटों का निर्माण अब तक अधूरा है।
आरोप है कि फ्लैट नहीं मिलने के बाद दोनों प्रोफेसरों ने रकम वापस करने के लिए बिल्डर पर दबाव बनाया। काफी प्रयास के बाद बिल्डर ने दोनों को 15-15 लाख रुपये के चेक दिए। बैंक में चेक जमा करने पर दोनों बाउंस हो गए। इसके करीब एक महीने बाद दोबारा चेक दिए गए, लेकिन वे भी बैंक में भुगतान नहीं हो सके।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पिछले दो वर्षों से बिल्डर का मोबाइल फोन बंद है। इसके बाद डॉ. रीता सिंह ने चितईपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बिल्डर अविनाश उपाध्याय, उसके भाई कालिंदी उपाध्याय, ऋषिकेश उपाध्याय और मां के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। थाना प्रभारी राकेश गौतम ने बताया कि मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।