फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिउतिया: संतान की दीर्घायु को महिलाएं रखेंगी निर्जला व्रत, 16 गांठों के रक्षा सूत्र का है महत्व; खास अनुष्ठान

Fri, 02 Oct 2026 05:57 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना से महिलाएं जिउतिया का निर्जला व्रत रखेंगी। घाटों और कुंडों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी तथा गंगा घाटों पर जीमूतवाहन की कथा गूंजेगी। महालक्ष्मी कुंड पर 16 गांठों वाले रक्षा सूत्र से 16 दिनी अनुष्ठान पूरा होगा। इसके साथ ही सोरहिया मेले का भी समापन होगा।
विज्ञापन
जितिया व्रत की शुभकामनाएं। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

काशी में संतान के दीर्घायु जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना के साथ महिलाएं जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) का व्रत रखेंगी। इसके साथ ही लक्सा स्थित प्राचीन लक्ष्मी कुंड पर चल रहे 16 दिवसीय पारंपरिक सोरहिया मेले का शनिवार को विधिवत समापन होगा।

विज्ञापन


बृहस्पतिवार को मां लक्ष्मी के दर्शन के लिए महिलाओं की लाइन लगी रही। जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर काशी के प्रमुख गंगा घाटों, अस्सी, दशाश्वमेध, पंचगंगा, ईश्वरगंगी, बरेका सूर्य सरोवा सहित विभिन्न कुंडों व सरोवरों पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा। माताएं 24 घंटे का निर्जला उपवास रखकर जीमूतवाहन की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगी। व्रती महिलाएं सुबह पवित्र नदियों व सरोवरों में स्नान कर संतान रक्षा का संकल्प लेंगी और कथा श्रवण के उपरांत बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल और अक्षत अर्पित करेंगी।

दूसरी ओर, सोरहिया मेले के अंतिम दिन लक्सा स्थित महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। यहां 16 दिनों तक कठोर अनुष्ठान करने वाली महिलाएं 16 गांठ वाले पवित्र रक्षा सूत्र (सोरहिया डोरा) का पूजन कर व्रत का उद्यापन करेंगी। देवी को 16 प्रकार के मौसमी फल, मिष्ठान्न और सुहाग सामग्री अर्पित की जाएगी।

मंदिर के महंत शिवप्रसाद पांडेय उर्फ लिंगिया महाराज ने बताया कि सोरहिया मेले के अंतिम दिन व्रती महिलाओं की भीड़ उमड़ेगी। महिलाएं मां लक्ष्मी के दर्शन कर संतान सुख की कामना करेंगी। वहीं माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु और सफलता की कामना करेंगी।
विज्ञापन

नहाय खाय से आज से शुरू होगा व्रत
संतान की दीर्घायु और कल्याण के लिए रखा जाने वाला तीन दिवसीय जिउतिया व्रत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष व प्रख्यात ज्योतिषविद् प्रो. नागेंद्र पांडेय और आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि इस व्रत को ''खर जिउतिया'' भी कहा जाता है। इस वर्ष अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ रही है।

शुक्रवार को व्रती महिलाएं नहाय-खाय की रस्म पूरी कर व्रत का संकल्प लेंगी। अष्टमी तिथि शनिवार को सुबह 9:53 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन रविवार को सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। शनिवार को को माताएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखेंगी। प्रदोष काल में शाम 6:05 बजे से विविध नैवेद्य के साथ जिउतिया माता और राजा जीमूतवाहन का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा तथा कथा का श्रवण होगा। अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद रविवार को सुबह 7:28 बजे से पारण किया जाएगा। रविवार की सुबह सुबह 7:27 बजे के बाद नवमी तिथि लगेगी, जो सोमवार सुबह 5:50 बजे तक ही रहेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें