देश-प्रदेश को कई नामी खिलाड़ी दे चुके ओलंपियन विवेक सिंह मिनी स्टेडियम शिवपुर का कोई रखवाला नहीं। घनी आबादी के बीच स्थित इस स्टेडियम की देखरेख न होने से उसका अस्तित्व ही दांव पर लग गया है। हालात से खिलाड़ी और खेल प्रेमी चिंतित हैं।
न सिर्फ सुविधा और संसाधन खस्ताहाल हैं बल्कि स्टेडियम का रखरखाव और निगरानी न होने से भी मुश्किलें बनी हुई हैं। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी से वीडीए, नगर निगम, खेल विभाग से जेल प्रशासन तक सबने पल्ला झाड़ लिया है।
कोई विभाग यह स्वीकारने तक को तैयार नहीं कि उसका इस स्टेडियम से कोई वास्ता है। जबकि, स्टेडियम वर्षों पुराना है और इसके आसपास वीडीए की ओर से कॉलोनियां विकसित की गई हैं।
खेल विभाग भी इस स्टेडियम को अपने अधीन नहीं मानता। ये हालात तब हैं, जब सूबे के खेल राज्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी इसी शहर के हैं। यह स्टेडियम किस विभाग के अधीन है, इस बारेे में स्थिति स्पष्ट न होने से खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि वे किसी भी तरह की समस्या पर किस विभाग के पास जाएं।
पूर्व हॉकी ओलंपियन विवेक सिंह शिवपुर के ही थे। उनके निधन के बाद खिलाड़ियों के आग्रह पर स्टेडियम का नामकरण किया गया था। तब उम्मीद जगी थी कि वर्षों पुराने इस स्टेडियम के विकास के लिए मजबूत पहल होगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
जगह-जगह ऊबड़खाबड़ मैदान में घास-पतवार उग आए हैं। रोजाना यहां प्रैक्टिस के लिए खिलाड़ी आते हैं लेकिन उन्हें हर छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए चंदे का सहारा होता है। नगर निगम और वीडीए का कहना है कि यह उनकी निगरानी में नहीं आता।
जिस जमीन पर स्टेडियम है वह पहले सेंट्रल जेल के अंतर्गत थी। हालांकि सेंट्रल जेल प्रशासन का कहना है कि स्टेडियम से उनके विभाग का कोई वास्ता नहीं है।