ताजिया जुलूस (सांकेतिक तस्वीर, फाइल फोटो)
छठीं मुहर्रम पर कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार गम ए हुसैन का सिलसिला जारी है। कच्ची सराय और रामनगर में महाराज बनारस की मन्नत का जुलूस नहीं उठाया गया। वहीं, अर्दली बाजार हाजी अबुल हसन के निवास पर छह माह के शहीद अली असगर के झूले की जियारत की गई।
शहर में कई जगहों पर मजलिसों के आयोजन हुए। इससे पहले रविवार की रात पांचवीं मुहर्रम को छत्तताले से अंजुमन हैदरी के जेरे इंतेजाम उठाया जाने वाला जुलूस भी नहीं उठा। जुलूस से भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की अजादारी की यादें जुड़ी हैं।
जिसमें वह शहनाई बजाकर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश करते थे। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि सातवीं मुहर्रम से गम में और इजाफा हो जाता है, क्योंकि इस दिन से यजीद की फौजों ने अपने नबी के परिवार वालों का पानी बंद कर दिया था।