उन्होंने कहा कि धरती के दूसरे भगवान डॉक्टर हैं। नर्स व अन्य चिकित्साकर्मी मानव सेवा के माध्यम से स्वयं के लिए मोक्ष के द्वार खोल लेते हैं। इसलिए उनके साथ किसी तरह का अमानवीय व्यवहार न करें। परमहंस स्वामी महाराज ने कहा कि आप चाहे जिस पंथ और संप्रदाय के हों, इस विकट परिस्थितियों में साथ मिलकर गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों की सेवा कर पुण्य अर्जित करें।
उन्होंने कहा कि सत, चित और आनंद ये तीन परमात्मा के स्वरूप हैं। सत्य प्रकट है। चित मौन है और आनंद अप्रकट है। यह समय इन तीनों माध्यम से हृदय में परमात्मा की अनुभूति करने वाला है। यथार्थ गीता में भी यही कहा गया है कि मानव सेवा सर्वश्रेष्ठ है। इससे उत्तम लोक की प्राप्ति निश्चित है। भारत सरकार व प्रदेश सरकार के लॉकडाउन के नियमों का पालन करके मानव जाति की यथा संभव मदद करें। जिस दिन यथार्थ गीता के ज्ञान का समाज को भान हो जाएगा, उस दिन समाज में व्याप्त तमाम संक्रमित विचारधाराओं का स्वत: शमन हो जाएगा।