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दर्दनाक कहानियां: कई परिवारों को जिंदगी भर का गम दे गया वाराणसी फ्लाईओवर हादसा

Thu, 17 May 2018 02:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के लिए मंगलवार का दिन अमंगल लेकर आया। जीवंत और गतिमान रहने वाली काशी मंगलवार शाम होते ही थम गई। कैंट स्टेशन के पास हुए फ्लाईओवर हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने कई परिवारों को जिंदगी भर का गम दे दिया है।

 कंचनपुर निवासी कुमकुम सिंह को क्या पता था कि पति आरबी सिंह के साथ होनहार बेटे वैभव को हमेशा-हमेशा के लिए खो देंगी। पति-पत्नी बेटे वैभव को कोटा रवाना करने के लिए रेलवे स्टेशन लेकर जा रहे थे कि तीनों हादसे का शिकार हो गए। हर परीक्षा में अव्वल रहा उनका बेटा जिंदगी की परीक्षा में फेल हो गया।
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 केवी कंचनपुर में दसवीं का छात्र वैभव शुरू से ही मेधावी रहा है। उसकी चाहत थी कि वह आगे चलकर इंजीनियर बनकर मां-बांप का सपना साकार करेगा। हाईस्कूल की परीक्षा देने के बाद तैयारी के लिए कोटा जा रहा था लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था।

हादसे में आरबी सिंह और उनके बेटे वैभव की मौत हो गई। पत्नी कुमकुम जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं। वह जब भी होश में आ रही हैं तो बेटे और पति की जानकारी चाह रही थीं। चिकित्सक भी उन्हें यह जानकारी देने से बच रहे हैं। वह पति के साथ बेटे वैभव को लेकर कैंट रेलवे स्टेशन जा रही थीं कि हादसा हो गया। 

जौनपुर का पूरा परिवार ही मौत का शिकार

- फोटो : अमर उजाला
फ्लाईओवर में घायल जौनपुर के चंदवक के रहने वाले एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। इसमें रामचंद्र (40), अरुण कुमार वर्मा (43) और विद्या देवी (50) का नाम शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक यह पूरा परिवार बनारस में किसी काम से साथ ही आया था। मंडलीय अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। अब परिवार के अन्य सदस्यों को यह खबर मिली तो मानों पहाड़ टूट गया है। 

आए थे इलाज कराने और गंवानी पड़ी जान 
घटना में कुछ ऐसे परिवार भी हैं, जिनके परिजन यहां इलाज कराने आए थे लेकिन उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। इनमें से एक भदोही निवासी राम जो अपने परिवारीजनों के साथ ही मंगलवार को दिन में यहां आए थे।

वह किसी काम से लहरतारा से कैंट की तरफ बोलेरो से जा रहे थे कि इसी बीच पुल का बीम गाड़ी पर आकर गिर गया। घायल समझकर किसी ने उन्हें लंका स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया जहां उनकी मौत हो गई लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों का पता नहीं चल पा रहा है। 

कोई हाथ हिला रहा था, कोई मांग रहा था पानी

- फोटो : अमर उजाला
बीम गिरने के बाद दुर्घटनास्थल पर मंजर यह था कि दबे-फंसे वाहनों से केवल चीखें सुनाई दे रही थीं। फंसे लोगों में से कोई हाथ हिला रहा था तो कोई पानी मांग रहा था। किसी गाड़ी में फंसे बच्चे की रोने की आवाज से भी कई लोग दर्द में नजर आए।

कहीं-कहीं तो केवल तड़प भर महसूस हो रही थी। वाहनों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने और वाहनों तक पहुंचने की जगह न होने के चलते आम लोग चाहकर भी उनकी मदद नही कर पा रहे थे।

जीवन की उम्मीद में एक स्विफ्ट कार में फंसी महिला हाथ हिला रही थी पर उस तक पहुंचे पर भी उसे निकालना संभव नहीं था। लोग बार-बार उन्हें निकालने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली। इसी तरह एक और व्यक्ति भीवाहन में फंसा बचाव के लिए चिल्ला रहा था।

कुछ देर बाद पानी मांगने लगा। लोगों ने उसे पानी पिलाया। मौके पर मौजूद विमल ने बताया कि लोग कांप रहे थे। मंजर देखकर कई महिलाएं तो रोने लगीं।  उधर, दुर्घटनास्थल के आसपास की कॉलोनियों में कई घरों में भोजन नही बना।

जहां खाना बना, वहां लोगों के गले निवाला नही उतरा। दर्द में भूख दबकर रह गई। देर रात तक केवल घटना को लेकर चर्चा होती रही। लोगों को रात में नींद भी बड़ी मुश्किल से आई।

बेटे का इलाज कराने आए पिता की मौत

- फोटो : अमर उजाला

खुशहाल राम का छोटा संजय बेटा कैंसर से पीड़ित था। सहेड़ी गाजीपुर निवासी अपने छोटे बेटे के इलाज के लिए वह वाराणसी आए थे। बड़े बेटे के साथ कीमो लगवाने के लिए बोलेरो से  पहुंचे थे। लेकिन ब्रिज के नीचे दबने से पिता की मौत हो गई।

वहीं दो बेटों और चालक का फिलहाल पता नहीं चल सका है। आशंका जताई जा रही है कि दो बेटों और चालक की भी हादसे में मौत हो गई है। संजय को कीमो लगवाने के बाद खुशहाल राम वापस लौट रहे थे तभी यह हादसा हो गया।

खुशहाल राम के रिश्तेदार फुलवरिया निवासी रामप्रसाद दिन में खाना देने के लिए आए थे। शाम को हादसे की सूचना मिलते ही वह भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि बेटे की बीमारी को लेकर पहले से ही खुशहाल परेशान थे।

उसके इलाज के लिए हर जगह भागते रहते थे। उधर खुशहाल राम का दूसरा नंबर का बेटा ब्रिजराज भारती गोरखपुर में आरपीएफ  में तैनात है। वहीं चौथे नंबर का बेटा संतोष कर्नाटक में इंजीनियर है। पिता और भाइयों की मौत की सूचना मिलते ही दोनों भाई बनारस हुए रवाना।
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बनारस के इंजीनियरिंग पर काला धब्बा

- फोटो : अमर उजाला

निर्माणाधीन फ्लाईओवर के दो बीम गिरने से हुआ हादसा बनारस के इंजीनियरिंग पर काला धब्बा बन गया है। इंजीनियरिंग से जुड़े जानकारों का मानना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और पिलर पर रखे बीम का संतुलन बिगड़ने के कारण दुर्घटना हुई है। हालांकि जिस पिलर पर बीम रखे हुए थे, वह पुरानी स्थिति में हैं।

सेतु निगम के रिटायर्ड इंजीनियर आरके सिंह और पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड इंजीनियर केएम श्रीवास्तव का इंजीनियरिंग में पहला अध्याय सिखाया जाता है कि काम वाली साइट पर खून की एक बूंद नहीं गिरनी चाहिए।

हादसा इंजीनियरिंग की तकनीक पर सवाल खड़े करता है। सिंचाई विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर वीके जायसवाल ने कहा कि जहां ओवरहेड काम होता है, वहां अधिक सावधानी बरती जाती है। काम कराने वाले ही बता सकते हैं कि वहां क्या कमी रह गई थी।


चौका घाट पुल-
लंबाई-1784 मीटर, लागत- 77.41 करोड़, पिलर-63, सितंबर 2015- काम प्रारंभ। मार्च, 2019-काम पूरा करने का लक्ष्य 

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