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वाराणसी जिला पंचायत में छिड़ा सियासी संग्राम, अध्यक्ष की कुर्सी खतरे में

Thu, 22 Jun 2017 02:14 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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भाजपा जिलाध्यक्ष और विधायकों के नेतृत्व में डीएम से मिले 28 जिला पंचायत सदस्य - फोटो : अमर उजाला
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सूबे की सत्ता बदलने के बाद अब जिला पंचायत में एकबारगी फिर कुर्सी पर कब्जे के लिए सियासी संग्राम छिड़ गया है। सपा की जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए विपक्षी लामबंद हो गए हैं।
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बुधवार को भाजपा विधायक सुशील सिंह, अवधेश सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुजीत सिंह और जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा के नेतृत्व में 28 जिला पंचायत सदस्यों ने डीएम योगेश्वर राम मिश्र से मुलाकात की। अपराजिता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए प्रार्थना पत्र देते हुए जल्द बैठक बुलाने का आग्रह किया। 

डीएम से मुलाकात के बाद सुशील सिंह और हंसराज ने दावा किया कि 32 जिला पंचायत सदस्य उनके साथ हैं। बता दें, वाराणसी जिले में 48 जिला पंचायत सदस्य हैं। सदन में बहुमत के लिए 25 सदस्यों की ही आवश्यकता है। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता का दावा है कि अब भी कम से कम 30 सदस्य उनके समर्थन में हैं। सियासी संग्राम छिड़ने से जिला पंचायत में गहमागहमी बढ़ गई है। 
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दिन में करीब साढ़े 11 बजे भाजपा विधायकों, नेताओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुजीत ने डीएम के सामने ही 28 सदस्यों की परेड कराई और अविश्वास प्रस्ताव के लिए प्रार्थना पत्र सौंपा।

डीएम को दिए गए ज्ञापन में भाजपा नेताओं ने अध्यक्ष अपराजिता पर अनियमितता के तमाम आरोप भी लगाए हैं। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जल्द ही सदन की बैठक बुलाई जा सकती है। बता दें कि 14 जनवरी 2015 को अपराजिता सोनकर ने कार्यभार संभाला था।
पूर्ववर्ती सपा सरकार में बनाए गए प्रावधान के तहत दो साल के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। 

इन सदस्यों की कराई गई परेड
आशा, गायत्री देवी, रीता देवी, पप्पू पटेल, भारतेश्वर, सुनीता, रमेश पटेल, जगदीश, ज्योति सिंह, राजकुमार पटेल, अखिलेश कुमार सिंह, अमित कुमार सोनकर, रितु सिंह, जितेंद्र कुमार, रमेश कुमार, कैलाशनाथ, उषा देवी, सविता, पार्वती, ओमप्रकाश सिंह, कुंवर बिरेंद्र कुमार, विकास, सुरेंद्र पटेल समेत 28 जिला पंचायत सदस्यों की डीएम के सामने परेड कराई गई। 
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तो फिर कोई महिला राजनीति में नहीं आएगी: अपराजिता

अखिलेश यादव के साथ अपराजिता सोनकर - फोटो : ‌facebook
अविश्वास प्रस्ताव के लिए लामबंदी पर जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर ने कहा कि पिछले दो सालों में जितना काम हुआ है, उतना काम पूर्व के पांच सालों में नहीं हुआ। जिला पंचायत के कार्यों में पूरी तत्परता और पारदर्शिता बरती गई।

जनहित से जुड़े हर प्रस्ताव को महत्व दिया गया और सभी जिला पंचायत सदस्यों के क्षेत्रों में काम कराया गया। अब भी उनके समर्थन में 30 सदस्य हैं। कुछ सदस्यों को डरा धमका कर डीएम के सामने ले जाया गया है। ऐसा नहीं होना चाहिए। कहा कि अगर उनके साथ इस तरह अन्याय किया गया तो आगे कोई भी महिला राजनीति में आने की हिम्मत नहीं करेगी। 

अपराजिता पर लगाए गए ये आरोप
डीएम से मिलने गए पंचायत सदस्यों ने अपने ज्ञापन में अपराजिता सोनकर पर कई आरोप लगाए। उनका कहना था कि जिला पंचायत की बैठक हर दो माह में एक बार बुलाई जानी चाहिए लेकिन कभी समय पर बैठक नहीं बुलाई जाती। सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। अध्यक्ष ने जिला पंचायत में अपने सगे-संबंधियों का पंजीयन कराया। अपने चहेतों को ही काम दिया। वर्ष 2015-16 में अनियमित ढंग से बैरियर से वसूली कराई गई, जिससे जिला पंचायत को क्षति हुई।

अपराजिता के भाजपा में आने की थी चर्चा
अपराजिता सोनकर के भाजपा में आने की चर्चा करीब दो महीने से चल रही थी। दरअसल अपराजिता को पंचायत अध्यक्ष बनाने वाले उनके मामा कैलाशनाथ सोनकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से अजगरा से विधायक चुने गए हैं। चर्चा रही कि कैलाश अपनी भांजी को भाजपा ज्वाइन कराकर कुर्सी बचा ले जाएंगे लेकिन यह समीकरण बैठ नहीं पाया।       
 
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