फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला की ओर से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में जुटे शहर के प्रबुद्धजन

Tue, 20 Jun 2017 06:50 PM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी
विज्ञापन
काशी की विरासत को संजोने-संवारने का एकजुट संकल्प - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विरासतों और परंपराओं को सहेजने, धरोहरों के अतीत को जानने और उनके संरक्षण के अलावा नदियों और जलाशयों का मानव जीवन के अस्तित्व से अंतर्संबंधों की तलाश अमर उजाला की ओर से आयोजित ‘काशी विरासत’ कार्यक्रम में की गई ।
विज्ञापन

व्यस्त जीवन की उलझनों से वक्त चुरा कर समाज के हर वर्ग की महत्वपूर्ण शख्सियतें एक जगह जुटीं और काशी की विरासत को संरक्षित-संवर्द्धित करने के लिए अपने अनुभव और विचार साझा किए।
आयोजन में एकत्रित जनप्रतिनिधियों, संतों, शिक्षाविदों, शासन-प्रशासन के आला अफसरों, उद्यमियों और प्रबुद्धजनों ने काशी की विरासत को स्वयं संजोने का संकल्प तो लिया ही, यह भी तय किया कि वे और लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे ताकि हमारी पीढ़ियों के लिए आने वाले कल सुखद, सुहावना और बेहतर हो...।
विज्ञापन



काशी और उसकी विरासत को संजोने, संवारने की दिशा में शनिवार की रात यादगार बन गई। कैंट स्थित होटल मदीन में अमर उजाला की ओर से आयोजित ‘काशी विरासत’ कार्यक्रम के दौरान काशी की प्राचीन धरोहरों, नदियों, कुंडों-तालाबों आदि की मौजूदा हालत का जिक्र हुआ।

विशेषज्ञ वक्ताओं ने कहा कि कभी काशी की पहचान रहीं वरुणा और असि नदी अपनी अस्तित्व रक्षा के लिए करुण पुकार कर रही हैं। परंपराओं और रीतियों से जुड़े प्राचीन कुंड और तालाब मनुष्य के स्वार्थ और शहरीकरण की आड़ में हो रहे अवैध कब्जों की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। 

अमर उजाला के डायरेक्टर प्रोबाल घोषाल की मौजूदगी में हुए विचार-विमर्श के दौरान बताया गया कि काशी की प्राचीन विरासत के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ‘अमर उजाला’ निरंतर अभियान चला रहा है।

खबरों की शृंखलाओं के जरिए लोगों को अपने गौरवशाली अतीत की याद दिलाते हुए बेहतर भविष्य के निर्माण का प्रयास कर रहा है। इस दौरान काशी की विरासतों के महत्व और उनके मौजूदा हालात का प्रस्तुतिकरण भी किया गया।

इस मौके पर मौजूद सभी विशिष्टजनों ने विरासत की गरिमा और उसके महत्व को स्वीकार किया तथा उनकी अस्तित्व रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रयास करने का भरोसा भी दिलाया। इस अवसर पर मौजूद संत समाज ने भी अपनी भूमिका निभाने का वचन दिया। 

कार्यक्रम में इनका हुआ सम्मान
 डॉ. नीलकंठ तिवारी, विधि न्याय सूचना खेल एवं युवा राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
 रामगोपाल मोहले, मेयर
केदारनाथ सिंह, एमएलसी
रविंद्र जायसवाल, विधायक, शहर उत्तरी
प्रो. जीसी त्रिपाठी, कुलपति, बीएचयू
डॉ. पृथ्वीश नाग, कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ
नितिन रमेश गोकर्ण, कमिश्नर
 दीपक रतन, आईजी रेंज
योगेश्वर राम मिश्र, डीएम
 नितिन तिवारी, एसएसपी
महामंडेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा
डॉ. कुलपति तिवारी, महंत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
डॉ. अशोक कुमार राय, अध्यक्ष आईएमए
 रवि प्रकाश चतुर्वेदी, सीटीएम, उत्तर रेलवे
 जितेंद्र श्रीवास्तव, वरिष्ठ सुरक्षा आयुक्त, डीरेका
 

कार्यक्रम में आए अतिथियों के बोल

‘काशी विरासत’ कार्यक्रम में जुटे शहर के मानिंद लोग - फोटो : अमर उजाला
अपनी जड़ों को पहचाने और उससे जुड़े बिना उसे सशक्त नहीं बनाया जा सकता है। जिस तरह से नदियों का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है वह चिंतनीय है। अमर उजाला की मुहिम में बीएचयू पूरी मदद करेगा। - प्रो. जीसी त्रिपाठी, कुलपति, काशी हिंदू विश्वविद्यालय 

नदियों को बचाने के साथ ही काशी के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है कि इसे दो साल के लिए ही सही केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जाए। इससे निश्चित रूप से विकास का एक नया मॉडल निकलेगा। 
- डॉ. पृथ्वीश नाग, कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ

काशी की विरासत को कैसे संजोया जाएगा, इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा। असि, वरुणा नदी की अस्तित्व रक्षा के सद्प्रयास में जनसहभागिता जरूरी है। नगर निगम की ओर से हरसंभव मदद की जाएगी। 
- रामगोपाल मोहले, महापौर
----------
असि और वरुणा नदी का जो स्वरूप पुराणों में है, वहीं देखने को मिले, इसके लिए अमर उजाला की ओर से किए जा रहे हर प्रयास में प्रशासनिक स्तर पर जरूरत के मुताबिक हर तरह सहयोग किया जाएगा। 
- नितिन रमेश गोकर्ण, कमिश्नर 

जिस उत्साह के साथ अमर उजाला की पूरी टीम इस मुहिम में लगी है, वह काबिले तारीफ है। चाहे अतिक्रमण हटवाने की बात हो या अभिलेख दुरुस्त कराने की, जिला प्रशासन अमर उजाला के साथ है। 
- योगेश्वर राम मिश्रा, जिलाधिकारी

अमर उजाला ने जो मुहिम शुरू की है, वह रंग लाने लगी है। काशी की विरासत को बचाने के लिए समन्वित प्रयास की आवश्यकता है। सभी एकजुट होकर इस दिशा में आगे बढ़ेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। 
- डॉ. कुलपति तिवारी, महंत, काशी विश्वनाथ मंदिर

 काशी की पहचान पूरे विश्व की विरासत रही है। अमर उजाला ने काशी के विरासत की रक्षा को लेकर जो संकल्प लिया है, वह तभी पूरा होगा, जब शासन-प्रशासन के अलावा सभी लोग इसमें अपना सहयोग देंगे।  - संतोष दास सतुआ बाबा, महामंडलेश्वर 

  अमर उजाला ने काशी की विरासत कार्यक्रम आयोजित कर सबका ध्यान आकर्षित किया है। उम्मीद है आगे भी लुप्त हो रही प्राच्य शिक्षा, कला और साहित्य को जीवंत करने के लिए भी ऐसा प्रयास किया जाएगा।  - चेत नारायण सिंह, शिक्षक एमएलसी 

काशी की धरोहरोें के संरक्षण और युवा पीढ़ी को इनसे जुड़े तथ्यों से रूबरू कराने के लिए अमर उजाला ने शानदार पहल की है। अब इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए काशीवासियों को आगे आने की जरूरत है।  - दीपक रतन, आईजी रेंज

धर्म, कला, संस्कृति, पर्यटन और तीर्थाटन का अनूठा संगम है काशी। अपनी जीवंतता के लिए मशहूर इस शहर की धरोहरों का संरक्षण बेहद जरूरी है और इस लिहाज से अमर उजाला की पहल सराहनीय है। 
- नितिन तिवारी, एसएसपी

हमारे शहर के पास विरासतों और परंपराओं का अंबार है। इनका संरक्षण जरूरी है लेकिन यह तभी हो सकेगा, जब समाज के हर वर्ग में इसके लिए लगन हो और उनकी ओर से अपने स्तर पर प्रयास किए जाएं। 
- दीनानाथ झुनझुनवाला, उद्यमी

जग विख्यात काशी की पहचान किसी भी तरह से धूमिल नहीं होने पाए। विरासतों के संरक्षण के लिए हमसे जब भी और जो भी सहयोग बन पड़ेगा, हम इसमें अपनी भूमिका पूरी जिम्मेदारी से निभाएंगे।
- किशन जालान, उद्यमी

काशी की विरासत को अक्षुण्य बनाए रखना सभी नागरिकों का कर्तव्य है। इस दिशा में सार्थक पहल पहली बार देखने को मिली है। सरकारी स्तर पर भी इसके लिए सकारात्मक प्रयास किया जाना जरूरी है।
- अशोक गुप्ता, उद्यमी

वरुणा और असि, वाराणसी की पहचान है। दोनों नदियों के पुनर्जीवन के साथ-साथ हमें गंगा घाटों के रखरखाव और तीर्थाटन को प्रोत्साहन की दिशा में हम सबको मिलकर काम करना होगा।
- आरके चौधरी, उद्यमी

काशी की धरोहरों के संरक्षण में सरकारी प्रयास के साथ-साथ यहां के लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। अमर उजाला ने यहां की विरासत को संरक्षित करने की जो पहल की है, वह जरूर कारगर होगी। 
- श्रीहरि प्रताप शाही, नगर आयुक्त  

देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध काशी की विरासतों को संरक्षित करने की जरूरत है। इसके लिए अमर उजाला की पहल सराहनीय है। यह जिम्मेदारी काशीवासियों की है कि वे कदम आगे बढ़ाएं। 
- डॉ. अशोक कुमार राय, अध्यक्ष आईएमए

देश की सांस्कृतिक राजधानी के रुप में काशी की जो पहचान है, उसे बरकरार रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इसे अक्षुण्य बनाए रखने के लिए अमर उजाला लगातार सराहनीय प्रयास करता आ रहा है।
- डॉ. ओपी उपाध्याय, चिकित्सा अधीक्षक सर सुंदर लाल अस्पताल

किसी भी शहर की विरासत, इतिहास के सजीव पन्ने होते हैं। यह हमें अतीत का स्मरण तो कराती ही है, अगली पीढ़ियों के सम्मान-स्वाभिमान और भविष्य में विकास के लिए भी उतने ही आवश्यक होते हैं।
- रवि प्रकाश चतुर्वेदी, चीफ एरिया मैनेजर, उत्तर रेलवे
 
विज्ञापन

सुरों से सजी ‘काशी विरासत’ की शाम

शास्त्रीय गायिका विष्णु प्रिया चक्रवर्ती ने दी प्रस्तुति - फोटो : अमर उजाला
 अमर उजाला की ओर से आयोजित ‘काशी विरासत’ कार्यक्रम में सुर सरिता भी बही। सुमधुर संगीत का श्रोताओं ने आनंद उठाया। कोलकाता से आईं शास्त्रीय गायिका विष्णु प्रिया चक्रवर्ती ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी।

विष्णु प्रिया की पहली पेशकश राग विहाग झप ताल में ‘सत वचना कहो सजना’ रही। इसके बाद इसी राग में तीन ताल में बंदिश ‘झूम-झाम, धूम-धाम, घर आवे गोरी’ पेश किया जिस पर जमकर तालियां बजीं। अगली प्रस्तुति राग गाढ़ा पंचम सेगारा में ठुमरी रही। बोल थे ‘कोई जाओ सइयां को ले आओ’।

इसके बाद कजरी ‘हमरे सांवरिया नहि आए, सजनी छाई घटा घनघोर’ ने उपस्थित श्रोताओं का दिल जीत लिया। इसके बाद ‘हो मिल महरम यार’ और ‘जाओ मैं तोहसे नाही बोलूं’ की प्रस्तुति हुई। तबले पर साथ दिया कोलकाता से आए सुरजातो रॉय ने।

हारमोनियम पर संगत की जमुना लाल बल्लभ भाई ने और तानपूरा पर पायल सोनी ने रागों की इस महफिल को और चटख कर दिया। इस दौरान कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें