छह महीनों के आंकड़े पर नजर डालें तो पांच लाख रुपये से अधिक राशि वाले 86 साइबर ठगी की शिकायतों में से महज 22 प्रतिशत मामलों में प्राथमिकी दर्ज हुई है। बाकी मामलों में जांच के नाम पर फाइल लंबित है।
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240 दिन में 86 मामले पांच लाख से ऊपर के
अप्रैल से दो नवंबर के बीच पांच लाख के ऊपर के फ्रॉड के 86 मामले सामने आए, जिसमें 18 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई। बाकी लंबित हैं। 27 अक्तूबर और दो नवंबर के बीच छह मामले आए जो अंडर प्रोसेस है।
केस एक
सिगरा निवासी विकास के साथ 2023 जून में क्रेडिट कार्ड पर बीमा एक्टिव होने की बात कहकर ओटीपी पूछा और 34 हजार निकाल लिए। थाने में सुनवाई नहीं हुई तो साइबर थाने पहुंचे। यहां से साइबर कैफे भेज दिया गया। ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। प्रकरण में क्या हुआ पता नहीं।
केस दो
भेलूपुर निवासी अमलेंदु दूबे ने बताया कि इस साल मई में एक लाख रुपये का साइबर फ्रॉड हुआ था। उन्होंने बैंक की मिलीभगत की बात कही थी। साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई तो उन्होंने चंदौली में जाकर प्राथमिकी दर्ज कराई।
केस तीन
पहड़िया निवासी विक्की सिंह के साथ एक साल पहले साइबर जालसाजों ने बिजली बिल के नाम पर 41 हजार की साइबर ठगी की थी। इस मामले में साइबर थाने और स्थानीय थाने के चक्कर लगाने के बाद उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराने से इन्कार कर दिया।
क्या बोले अधिकारी
साइबर फ्रॉड से जड़े मामलों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए हैं। प्राथमिकी न दर्ज करने की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। बड़े मामलों में कमिश्नरेट पुलिस रकम होल्ड कराने के साथ ही कानूनी प्रक्रिया के तहत पैसे रिकवर कर रही है। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। -सरवणन टी, डीसीपी क्राइम