फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वाराणसी में तीन बच्चियों की मौत: कनेर का बीज खाने से बिगड़ी तबीयत, दो थीं सगी बहनें, एक-एक कर तोड़ा दम

Mon, 05 Jan 2026 08:48 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: तीन बच्चियों की माैत की जानकारी मिलते ही माैके पर मिर्जामुराद थाने की पुलिस भी पहुंच गई। दो ने माैके पर और तीसरी बच्ची ने अस्पताल में दम तोड़ा है। दोनों परिवार में कोहराम मच गया था।
विज्ञापन
तीना बच्चियों की फाइल फोटो। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वाराणसी जिले के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के करधना गांव में रविवार और सोमवार को 24 घंटे के दौरान कनेर की फली का बीज खाने से दो सगी बहनों हर्षिता (6 साल) व अंशिका (3 साल) और नैंसी (4 साल) की मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बगैर ही बहनों का दाह संस्कार कर दिया। नैंसी की मौत सोमवार की दोपहर में हुई। इसके बाद मिर्जामुराद पुलिस ने उसके शव को कब्जे में लिया। उसका पोस्टमार्टम कराया जाएगा। परिजनों ने मिर्जामुराद थाने की पुलिस को बताया कि तीनों बच्चियों ने आंवला समझकर कनेर का बीज खाया था। दो दिन से दोनों पड़ोसियों के घरों में चूल्हे नहीं जले हैं। 

विज्ञापन


जिस स्थान से बच्चियों ने जहरीला बीज खाया था, वहां मौजूद पेड़ को भी परिजनों ने उखाड़ कर फेंक दिया है।करधना गांव निवासी मिथलेश प्रजापति की बेटियां हर्षिता और अंशिका और उनके पड़ोसी मनीष प्रजापति की बेटी नैंसी समेत सात बच्चे रविवार की सुबह गांव में ही घर से कुछ दूरी पर खेल रहे थे। इसी दौरान बच्चों ने खेलते-खेलते कनेर की फली देखी और उसे तोड़ लिया। 

नैंसी, हर्षिता और अंशिका ने उसे आंवला समझकर खा लिया। कुछ देर बाद पेट में दर्द शुरू हुआ तो, तीनों बच्चियां अपने-अपने घर चली गईं। शाम होते ही हर्षिता की तबीयत बिगड़ गई। परिजन आनन-फानन में उसे एक निजी अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। परिजन इस सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि सोमवार की सुबह हर्षिता की छोटी बहन अंशिका की तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे भी अस्पताल ले गए जहां सोमवार की दोपहर इलाज के दौरान मौत हो गई। एक ही परिवार की दो बच्चियों की मौत से गांव में मातम पसर गया। 

विज्ञापन

परिजनों से घटना की जानकारी लेते पुलिस अधिकारी। - फोटो : संवाद
इसी बीच नैंसी की तबीयत भी बिगड़ गई। परिजन उसे तत्काल बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर ले गए जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। 24 घंटे में तीन बच्चियों की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची मिर्जामुराद थाने की पुलिस ने पीड़ित परिजनों से जानकारी ली। गोमती जोन के एडीसीपी वैभव बांगर और नायब तहसीलदार दीपाली मौर्य ने भी परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली। 

स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची गांव, बच्चों का हुआ परीक्षण
हर्षिता और अंशिका की मौत के बाद उनके इकलौते भाई हर्ष का रो-रोकर हाल खराब है। पिता मिथलेश बुनकर का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। वहीं, नैंसी दो बहनों में दूसरे नंबर की थी। उसका दो महीने का भाई भी है। पिता मनीष बंगलूरू में ऑटो चलाते हैं। सूचना मिलने के बाद वह सोमवार को विमान से गांव पहुंचे। मां अंजली सहित अन्य परिजनों का रो-रोकर हाल खराब है। घटना से बस्ती के लोग भी सशंकित हैं। अन्य बच्चों की जांच की मांग पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और बच्चों का परीक्षण किया गया।  

विज्ञापन

बच्चियों की मौत से परिवार टूटा

हर्षिता और अंशिका की मौत से परिजन सदमे में हैं। बड़े पिता लवकुश प्रजापति ने बताया कि घर के पास ही आंवले का पेड़ है। इसी पेड़ से सटाकर कनेर का पेड़ लगाया गया है। रविवार की दोपहर बच्चे पेड़ के पास ही खेल रहे थे। कुछ बच्चों ने गिरे हुए आंवले खाए और कुछ ने कनेर के फल के बीज भी खा लिए। बच्चियों की मौत से पूरा परिवार टूट गया है।

इस संबंध में एडीसीपी गोमती जोन वैभव बांगर ने बताया कि हर्षिता और अंशिका दोनों सगी बहनें थीं। परिजनों ने बिना सूचना दिए उनका दाह संस्कार कर दिया। जबकि पड़ोस में रहने वाली बच्ची नैंसी के शव को संरक्षण में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें