परिजनों से घटना की जानकारी लेते पुलिस अधिकारी।
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इसी बीच नैंसी की तबीयत भी बिगड़ गई। परिजन उसे तत्काल बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर ले गए जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। 24 घंटे में तीन बच्चियों की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची मिर्जामुराद थाने की पुलिस ने पीड़ित परिजनों से जानकारी ली। गोमती जोन के एडीसीपी वैभव बांगर और नायब तहसीलदार दीपाली मौर्य ने भी परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली।
स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची गांव, बच्चों का हुआ परीक्षण
हर्षिता और अंशिका की मौत के बाद उनके इकलौते भाई हर्ष का रो-रोकर हाल खराब है। पिता मिथलेश बुनकर का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। वहीं, नैंसी दो बहनों में दूसरे नंबर की थी। उसका दो महीने का भाई भी है। पिता मनीष बंगलूरू में ऑटो चलाते हैं। सूचना मिलने के बाद वह सोमवार को विमान से गांव पहुंचे। मां अंजली सहित अन्य परिजनों का रो-रोकर हाल खराब है। घटना से बस्ती के लोग भी सशंकित हैं। अन्य बच्चों की जांच की मांग पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और बच्चों का परीक्षण किया गया।
हर्षिता और अंशिका की मौत से परिजन सदमे में हैं। बड़े पिता लवकुश प्रजापति ने बताया कि घर के पास ही आंवले का पेड़ है। इसी पेड़ से सटाकर कनेर का पेड़ लगाया गया है। रविवार की दोपहर बच्चे पेड़ के पास ही खेल रहे थे। कुछ बच्चों ने गिरे हुए आंवले खाए और कुछ ने कनेर के फल के बीज भी खा लिए। बच्चियों की मौत से पूरा परिवार टूट गया है।
इस संबंध में एडीसीपी गोमती जोन वैभव बांगर ने बताया कि हर्षिता और अंशिका दोनों सगी बहनें थीं। परिजनों ने बिना सूचना दिए उनका दाह संस्कार कर दिया। जबकि पड़ोस में रहने वाली बच्ची नैंसी के शव को संरक्षण में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।