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Varanasi Bomb Blast Case: कॉल डिटेल खंगालने में पुलिस के हत्थे चढ़ा था वलीउल्लाह, हूजी कमांडर शमीम अब भी फरार

Mon, 06 Jun 2022 01:54 PM IST
उत्पल कांत शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी

सार

काशी को दहलाने की साजिश रचने वाले आतंकियों ने फूल प्रूफ प्लानिंग की थी। तत्कालीन उपाधीक्षक भेलूपुर त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने विवेचना शुरू की तो कॉल डिटेल में बनारस ब्लास्ट का दोषी करार दिया जा चुका वलीउल्लाह सहित कई लोगों के मोबाइल नंबर पुलिस के हत्थे चढ़े।
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वलीउल्लाह - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सात मार्च 2006 की वह भयावह शाम में जगह-जगह पड़े मांस के लोथड़ों के बीच शुरू हुई पड़ताल में दहशतगर्दों तक पहुंचने के लिए पुलिस के पास कोई सुराग तक नहीं था। मगर, पुलिस ने एसटीएफ और एटीएस के साथ मिलकर जांच शुरू की तो कॉल डिटेल खंगालने में ही बनारस ब्लास्ट को अंजाम देने वालों की शिनाख्त शुरू हो गई।

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तत्कालीन उपाधीक्षक भेलूपुर त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने विवेचना शुरू की तो कल डिटेल में बनारस ब्लास्ट का दोषी करार दिया जा चुका वलीउल्लाह सहित कई लोगों के मोबाइल नंबर पुलिस के हत्थे चढ़े। इसमें वलीउल्लाह की पड़ताल किए जाने पर पुलिस ने पाया कि यह इस हादसे से पहले वह कभी बनारस नहीं आया था।

वलीउल्लाह ने जाहिर किए थे जेहादी इरादे
अचानक उसकी शहर में आमद को लेकर पुलिस ने कड़ी मिलानी शुरू की तो सारे तार जुड़े गए। लंबी जांच व पड़ताल के बाद पुलिस ने वलीउल्लाह को लखनऊ के पास से गिरफ्तार किया था। पुलिस गिरफ्त में आने के बाद जब उससे पूछताछ शुरू हुई तो उसने अपने जेहादी इरादे भी जाहिर किए थे।

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बनारस ब्लास्ट में आईएसआई के पुराने मॉड्यूल से जुड़े आतंकियों के तार जुड़े होने की पुष्टि हुई थी। हालांकि इस पूरी मशक्कत के बाद वारदात में शामिल हूजी कमांडर शमीम सहित तीन आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

कैंट रेलवे स्टेशन और संकट मोचन मंदिर पर हुए ब्लास्ट में दर्ज मुकदमे के विवेचक त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने बताया कि पहले हुई आतंकी घटनाओं में शामिल दशगतगर्दों के बारे में जांच शुरू की और काल डिटेल खंगालनी शुरू की। इसमें वलीउल्लाह का नंबर ऐसा था जो बनारस में पहली बार एक्टिव था। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ाई तो उसका कनेक्शन सामने आया। उन्होंने बताया कि उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके पास से विस्फोटक, डेटोनेटर और हथियार बरामद किया गया था।

मानसिक संत्रास से गुजरा, मगर अब सेवा के हर्ष का दिन

तत्कालीन विवेचक और वर्तमान में अपर पुलिस अधीक्षक त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
तत्कालीन विवेचक और वर्तमान में अपर पुलिस अधीक्षक त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी का कहना है कि गाजियाबाद में सुनवाई के दौरान कई बार मुझे वहां जाना पड़ा। इस दौरान मैं पूरी सुरक्षा के साथ वहां जाता था और कई बार मुझे मानसिक संत्रास से गुजरना पड़ा। न्यायालय ने वलीउल्लाह को दोषी करार दिया है, ऐसे में यह दिन मेरी सेवा का अतीव हर्ष का दिन है।

देवबंद और बांग्लादेश से जुड़े के आतंकियों के तार
पुलिस की पड़ताल में बनारस ब्लास्ट करने वाले आतंकियों के तार बांग्लादेश से जुड़े मिले थे। वलीउल्लाह ने दारुल उलूम देवबंद से पढ़ाई की थी और घटना में शामिल मोहम्मद जकारिया, मुस्तफिज और बशीर से उसी दौरान उसका संपर्क हुआ था। विस्फोट से पहले यह सारे अफगानिस्तान के जेहादी मैगजीन को पढ़ते थे और उसी तरह की मानसिकता के साथ बनारस आए थे। मोहम्मद जकारिया, मुस्तफिज और बशीर बांग्लादेश से आए थे और यही कारण है कि इनका कोई रिकार्ड यहां नहीं मिला।

बनारस ब्लास्ट से पहले भी पकड़ा जा चुका था वलीउल्लाह

फूलपुर के एक मदरसे में मौलवी वल्लीउल्लाह बनारस ब्लास्ट से कुछ साल पहले भी पुलिस के हत्थे चढ़ा था। उसकी लकड़ी की टाल से पुलिस ने छापेमारी कर एके-47, आरडीएक्स सहित अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं पकड़ी थीं। बाद में वह जमानत पर छूट गया था।
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सीरियल ब्लास्ट से पहले लश्कर ए तैयबा से जुड़े आतंकियों ने की थी पूरे शहर की रेकी

वाराणसी में 16 साल पहले सीरियल ब्लास्ट - फोटो : सोशल मीडिया।
काशी को दहलाने की साजिश रचने वाले आतंकियों ने फूल प्रूफ प्लानिंग की थी। उस समय के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिस तरीके से आतंकियों ने काशी में सीरियल बम ब्लास्ट की योजना बनाई थी, उसमें उतना कामयाब नहीं हो पाए थे। यदि दशाश्वमेध का कुकर बम फटा होता जनहानि हजारों में पहुंच जाती।

उन्होंने बताया कि लश्कर ए तैयबा से जुड़े आतंकियों के माड्यूल ने ब्लास्ट से पहले यहां रेकी की थी। इसके बाद उन्होंने बिहार से बम बनाने का सामान खरीदा था। जिसे नेपाल के जरिये यहां प्लांट किया गया था। समय और स्थान इस तरीके से तय किया गया था बड़ी जनहानि हो सके। उन्होंने समय पौने छह बजे से लेकर साढ़े सात बजे के अंदर का चुना था। यही कारण था कि पहला ब्लास्ट संकटमोचन मंदिर में शाम साढ़े पांच बजे के बाद हुआ था।

जिस समय मंदिर में शादी करने और दर्शन पूजन करने वालों की भीड़ होती है। इसके बाद दूसरा ब्लास्ट कैंट स्टेशन पर किया गया था। उस समय शिवगंगा ट्रेन आने वाली थी। उस समय भी यहां काफी भीड़ होती है। इसके बाद तीसरा ब्लास्ट करने के लिए दशाश्वमेध मार्ग पर कुकर बम रखा गया था। उस समय आरती के बाद हजारों श्रद्धालुओं का रेला सड़क पर होता है। ऐसी स्थिति में यह कुकर बम फटता तो जनहानि बहुत अधिक होती।
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