वाराणसी के महमूरगंज स्थित स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग की धोखाधड़ी और जालसाजी के कारनामे एक-एक कर सामने आ रहे हैं। स्कूल ने सिर्फ छात्र-छात्राओं के साथ ही धोखाधड़ी नहीं की है बल्कि, खुद के प्रचार और लाभ के लिए नामी रेडियो जॉकी और टीवी एंकर के नाम का भी फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया है। इसका खुलासा यूट्यूब पर स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग की ओर से पोस्ट एक वीडियो से हुआ है।
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वीडियो में स्कूल का दावा है कि उन्होंने इलाहाबाद के एक नामी रेडियो एफएम में आरजे शशांक का प्लेसमेंट कराया था। आरजे शशांक को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने वीडियो जारी कर कहा कि स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग से उनका कोई वास्ता नहीं है और न ही उनके प्लेसमेंट में इस संस्थान की कोई भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि स्कूल के दावे से गुमराह होने की जरूरत नहीं है। उधर, इस स्कूल से संबंधित प्रकरण की जांच के लिए डीएम ने एडीएम वित्त एवं राजस्व मनोज राय को नामित कर दो हफ्ते में रिपोर्ट तलब की है।
आईजी रेंज के निर्देश पर 28 अप्रैल को सिगरा थाने में स्कूल ऑफ ब्राडकास्टिंग के संचालक साईं शेखर तिवारी, सेंटर हेड मोना जसलानी, यथार्थ दीप और प्रशांत शुक्ला के खिलाफ धोखाधड़ी, छल, जान से मारने की धमकी देने और यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज किया गया था।
शिकायत करने वाले 20 छात्र-छात्राओं ने फीस के नाम पर 20 लाख रुपये ऐंठने, प्लेसमेंट न कराने, स्कूल के फर्जी होने और शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
ख्यात आरजे से है संबंध, प्लेसमेंट में नहीं आएगी दिक्कत
चारों नामजद आरोपी भूमिगत, बयान के लिए तलाश रहे विवेचक
- फोटो : अमर उजाला
मुकदमा दर्ज होने के बाद से महमूरगंज स्थित स्कूल का कार्यालय छोड़कर चारों नामजद आरोपी भूमिगत हो गए हैं। मुकदमे की विवेचना कर रहे दरोगा अरुण सिंह ने बताया कि बार-बार स्कूल के कार्यालय जाने और सूचना देने के बावजूद भी नामजद आरोपी तफ्तीश में सहयोग के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
आरोपी सहयोग नहीं करेंगे तो सख्ती से पेश आकर पुलिस कार्रवाई करेगी। वहीं, इस संबंध में जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा ने बताया कि दर्ज एफआईआर की तफ्तीश पुलिस पारदर्शी तरीके से तेज गति से करे। एडीएम वित्त एवं राजस्व मामले की जांच कर दो हफ्ते में रिपोर्ट देंगे।
पीड़ित छात्र-छात्राओं ने बताया कि स्कूल ऑफ ब्राडकास्टिंग के संचालक उन्हें हमेशा आश्वस्त करते थे कि उनके ताल्लुकात सभी नामी रेडियो एफएम के ख्यात आरजे से है। पढ़ाई और प्लेसमेंट कहीं भी दिक्कत नहीं आएगी।
मगर, प्लेसमेंट तो दूर पढ़ाई और प्रैक्टिकल ही कभी नहीं हुआ। स्कूल संचालकों का सारा फोकस दाखिले के बाद छात्र-छात्राओं से फीस जल्द से जल्द जमा कराने पर रहता था।
एडीएम भी करेंगे स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग मामले की जांच
जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने महमूरगंज स्थित स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े मुकदमे को संज्ञान में ले लिया है। डीएम ने पूरे मामले की जांच एडीएम से कराने का फैसला किया है। मिश्र ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सिगरा थाने में स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग के प्रबंधक साईं शेखर तिवारी, सेंटर हेड मोना जसलानी, यथार्थ दीप और प्रशांत शुक्ला के खिलाफ धोखाधड़ी, छल, जान से मारने की धमकी देने और यौन उत्पीड़न का मुकदमा 28 अप्रैल को दर्ज किया गया है।
स्कूल के 20 छात्र-छात्राओं का आरोप है कि फीस के तौर पर उनसे 20 लाख रुपये जमा कराए गए लेकिन ना तो कभी कक्षाएं चलीं और ना किसी का प्लेसमेंट हुआ। संचालक से बात करने पर देख लेने की धमकी दी गई।
इस बारे में दर्ज मुकदमे की विवेचना सिगरा पुलिस कर रही है। फिलहाल गिरफ्तारी के डर से चारों आरोपी फरार हैं। विवेचना कर रहे दरोगा को पीड़ित छात्र-छात्राओं ने अपने-अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। आरोपियों का बयान दर्ज करने के लिए उनकी तलाश की जा रही है। कहा जा रहा है कि आरोपी एक-दो दिन में पुलिस के सामने स्कूल से संबंधित दस्तावेज और अपने बचाव में तर्क रखने की कोशिश में हैं।
उधर, जिलाधिकारी ने भी अपने स्तर से अलग जांच कराने का निर्णय लिया है। कहा, पढ़ाई, फीस, प्लेसमेंट आदि के नाम पर निजी संस्थानों की मनमानी और छात्र-छात्राओं का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एडीएम स्तर के अधिकारी मामले की जांच करेंगे और यदि किसी अन्य संस्थान की भी गड़बड़ी सामने आई तो कार्रवाई की जाएगी।