अप और डाउन स्ट्रीम के गंगाजल की गुणवत्ता में बड़ा अंतर
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जिस शहर में रहने वाले लोगों की जीविका गंगा है। जिस शहर की संस्कृति गंगा से शुरू होती है, यही नहीं, जो शहर गंगा के बिना अधूरा है, उस गंगा को काशी के लोग ही प्रदूषित कर रहे हैं। गंगा के शहर में प्रवेश के करने से पहले और शहर से बाहर निकलने के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण विभाग के जल जांच के आंकड़े तो यही कर रहे हैं।
विश्व सुंदरी पुल से लेकर वरुणा संगम स्थल तक गंगा काशी में रहती हैं। इस लगभग पांच किलोमीटर के क्षेत्र में शहर के 20 लाख आबादी वाले क्षेत्र के लिए करीब 832 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाई गई है।
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इससे करीब 350 एमएलडी मलजल और औद्योगिक प्रदूषित जल बाहर निकलता है, जबकि इसके शोधन के लिए केवल तीन प्लांट हैं। 9.8 एमएलडी क्षमता का भगवानपुर, 80 एमएलडी का दीनापुर और 12 एमएलडी का डीएलडब्लू सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कुल 102 एमएलडी सीवेज ही ट्रीट कर पा रहा है।
बाकी का 248 एमएलडी सीवेज प्रतिदिन गंगा में मिलता है। जाहिर है कि काशी में प्रवेश करते समय गंगा साफ-सुथरी होती है। इसमें गिरने वाले नालों की गंदगी से गंगा में प्रदूषण दोगुना तक बढ़ जाता है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि गंगाजल का टेस्ट दो भाग अप और डाउन स्ट्रीम में किया जाता है। विश्वसुंदरी पुल के आसपास अप स्ट्रीम हैं और डाउन स्ट्रीम वरुणा का संगम है। दोनों जगह पर जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाती है।
गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार चिंतित है। गंगा की अविरलता के लिए नमामि गंगे के तहत काम भी चल रहा है इसके बाद भी गंगा गर्मी में किनारा छोड़ने लगी हैं और जगह- जगह जल की जगह रेत की चादर बिछ गई है।
पांच साल में गंगा प्रदूषण की स्थिति
पूर्वांचल की पहली प्रदूषण परीक्षण प्रयोगशाला जल्दी ही शुरू होने वाली है। यहां घरेलू जल और गंगाजल प्रदूषण की जांच के साथ ही किसानों की मिट्टी का परीक्षण भी हो सकेगा। बीएचयू के जलविज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी ने अत्याधुनिक संयंत्रों से लैस प्रयोगशाला का निर्माण किया है। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।
प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि प्रयोगशाला में गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए शोध कार्य भी किए जाएंगे। इसमें आम लोग भी अपने घरों के पानी की जांच करा सकेंगे।
गंगा प्रदूषण की स्थिति
वर्ष -- अप स्ट्रीम पीएच -- डाउन स्ट्रीम पीएच---- अप स्ट्रीम बीओडी--- डाउन स्ट्रीम बीओडी
2017--- 8.02--- 8.39--- 3.09--- 5.03
2016--- 8.02--- 8.39--- 3.09--- 5.03
2015 --- 8.02--- 8.39--- 3.09--- 5.03
2014--- 8.24---- 8.59--- 2.86--- 4.56
2013--- 7.97----- 8.30 --- 2.94--- 4.78
ये है मानक
मानक के अनुसार बीओडी की मात्रा तीन मिलीग्राम से नीचे होना चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार यह लगभग दोगुना 5.03 हो गया है। वहीं गंगाजल में पीएच आठ होना चाहिए, जोे 8.12 हो गया है। ऐसे में इन मानकों के ऊपर जाने पर गंगाजल से लोगों को पीलिया और कालरा जैसे रोगों का खतरा बढ़ गया है।
गंगा हरीतिमा अभियान 15 मई से शुरू होगा
पौधरोपण
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गंगा के किनारों को हरा-भरा करने के लिए शुरू गंगा हरीतिमा अभियान के तहत वाराणसी में 55 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए सर्वेक्षण चल रहा है। 15 मई से अभियान शुरू हो जाएगा। इसमें जहां एक ओर गंगा के घाटों पर पौधे लगाए जाएंगे, वहीं गंगा किनारे के गांवों में भी पौधरोपण किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अभियान का शुभारंभ इलाहाबाद से 7 अप्रैल को कर चुके हैं।
वायु प्रदूषण को कम करने और गंगा के घाटों पर हरियाली के लिए पौधे लगाने की तैयारी है। वन विभाग को वाराणसी में 55 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। सबसे अधिक 50 हजार पौधों के लिए जमीन डोमरी में चयनित की गई है। डोमरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चौथे सांसद आदर्श गांव के तौर पर गोद लिया है।
बाकी के पौधों के लिए अन्य जगहों का चयन किया गया है। इसमें फलदार, औषधीय और व्यावसायिक पौधे शामिल हैं। गंगा के तट पर प्राचीन औषधियां और पंचवटी, नवग्रह और नक्षत्रशाला के पौधे लगाए जाएंगे।
डीएफओ गोपाल ओझा ने बताया कि इस अभियान में लोगों को पर्यावरण और नदी के प्रति जागरूक करने से लेकर पौधे लगाने की प्रेरणा देने और उनको बचाने का भी काम किया जाएगा।