मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त हों लेकिन काशी में उनके निर्देशों का मखौल उड़ाया जा रहा है। कहने को वाराणसी जिला प्रशासन ने राजातालाब में 60, सदर में 50 और पिंडरा में 52 भू-माफियाओं की सूची तैयार की और शनिवार-रविवार दो दिन अभियान चलाया लेकिन अब तक किसी बड़े कब्जेदार पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
पूरा अभियान कब्जेदारों को नोटिस भेजने और नाली-खड़ंजा, तालाबों से अतिक्रमण हटाने तक सिमट कर रह गया। प्रशासन की ढिलाई से बड़े भू-माफियाओं को बचाव का मौका मिल रहा है।
इनमें कुछ प्रशासन के खिलाफ अदालत चले गए हैं। इस बीच, भू-माफिया की सूची में शामिल एक संस्था के प्रमुख ने अपनी सभी संपत्तियों का ब्यौरा प्रशासन को उपलब्ध करा दिया है। उनका दावा है कि उन्होंने किसी सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं किया।
शासन के निर्देश पर प्रशासन ने तकरीबन एक माह पूर्व जिले के भू-माफियाओं की सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। प्रशासन, नगर निगम, विकास प्राधिकरण और पुलिस के पुराने रिकार्ड को खंगालने के बाद राजातालाब में 60, सदर में 50 तथा पिंडरा में 52 भू-माफियाओं को चिह्नित किया गया है।
एसडीएम को निर्देशित किया कि जिन भूखंडों को भू-माफियाओं के चंगुल से खाली कराया जाए, उसे सरकारी उपयोग के लिए मौकेे पर ही विभागों को आवंटित भी कर दिया जाए। गैंगस्टर लगाने का भी निर्देश था।
भू-माफियाओं के कब्जे में 7.516 हेक्टेयर से ज्यादा सरकारी जमीन है। इसमें कई रसूखदार भी शामिल हैं। डीएम के निर्देश पर शनिवार और रविवार को चलाए गए अभियान के दौरान कुछ जगहों पर नाली, खड़ंजा और तालाब से अतिक्रमण और कब्जे हटवाए गए।
बड़े भू-माफियाओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीएम योगेश्वर राम मिश्रा का कहना है कि कार्रवाई तीनों तहसीलों में हुई है। स्वतंत्रता दिवस के बाद कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी।