मांस-मछली खाने वाले नहीं सजाते मंदिर : मालियों के अनुसार मंदिर सजावट के दौरान इन्हें और कारीगरों को कड़े प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है। मंदिर सजाने वाले कारीगरों को शराब, मांस-मछली खाना निषेध होता है। यदि ऐसी कोई सूचना मिलती है तो उसे तत्काल मंदिर परिसर में प्रवेश करने से मना कर दिया जाता है। हर बार हाथ धुलकर ही माला-फूल छूने का नियम है। विश्वनाथ मंदिर के अलावा संकठा जी और बटुक भैरव मंदिर को भी सजाने का काम करते हैं। जिस दिन बाबा विश्वनाथ की सजावट होगी उसी दिन कहीं और नहीं जाते।
यादव बंधु मणिकर्णिका घाट से भरेंगे जल, पश्चिम गेट से करेंगे प्रवेश
सावन पहले सोमवार को यादव बंधुओं की ओर से जलाभिषेक कलश यात्रा निकाली जाएगी। यादव बंधु मणिकर्णिका घाट से जलभर कर मंदिर के पश्चिमी द्वार से प्रवेश कर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करेंगे। इस दौरान इस गेट के अलावा कोतवालपुरा व नंदु फड़िया मार्ग से श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद रहगा। जबकि उनकी निकासी चार नंबर गेट से होगी।
इस पर जिला प्रशासन, मंदिर प्रशासन से सहमति बन गई है। 40 हजार से अधिक यादव बंधुओं के शामिल होने की उम्मीद है। चंद्रवंशी गोप सेवा समिति की बैठक रविवार को बुलानाला स्थित श्रीकृष्ण बालिका विद्यालय में हुई। यादव बंधुओं के अनुसार जलाभिषेक यात्रा श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर सहित नौ शिवालयों व देवालयों जलाभिषेक करेंगे।
समिति के अध्यक्ष लालजी चंद्रबंशी ने कहा कि जलाभिषेक यात्रा डेढसी के पुल, ढूंढ़ीराज गणेश मंदिर होते हुआ पश्चिम गेट से श्रीकाशी विश्वनाथ में प्रवेश करेंगे। मंदिर में सुबह 8:30 से नौ बजे तक पहुंचेगी। गर्भगृह में 21 लोगों को ही प्रवेश मिलेगा। मंदिर प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए ज्यादा लोगों को प्रवेश का आदेश नहीं दिया है। जलाभिषेक करने के बाद वहां से गेट नंबर चार से बाहर निकलेंगे। यहां से श्रीमहामृतुंजय मंदिर में जलाभिषेक के लिए प्रस्थान करेंगे।