बनारस की सबसे वीवीआईपी सीट शहर दक्षिणी में भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर नजर आई। हाथी की चाल जहां सुस्त नजर आई वहीं हाथ का पंजा भी दूर-दूर तक नजर नहीं आया। भाजपा के गढ़ वाले मतदान केंद्रों पर मतों का जमकर ध्रुवीकरण हुआ। मतदाता कहीं भाजपा तो कहीं सपा के पक्ष में लामबंद नजर आ रहे थे।
मतदाताओं की नाराजगी दूर करने के सारे प्रयास नाकाफी साबित हुए और उसका असर मतदान पर साफ देखने को मिला। पीलीकोठी वाले इलाके में मुस्लिम मतदाता पूरी तरह से लामबंद नजर आए और एक ही दल को मतदान कर रहे थे। दशाश्वमेध, बांसफाटक और चौक क्षेत्र में भाजपा को जमकर वोट पड़े। सपा ने यहां भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वोटों के बंटवारे ने प्रत्याशियों की पेशानी पर बल डाल दिया है।
2017 चुनाव परिणाम
डॉ. नीलकंठ तिवारी - 92560- भाजपा
डॉ. राजेश मिश्रा- 75334- कांग्रेस
राकेश त्रिपाठी-59225 बसपा
कैंट विधानसभा के मतदाता एक बार फिर से अपनी पुरानी लीक पर ही आगे बढ़े। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले कैंट विधानसभा की सीट पर कांग्रेस से सीधा मुकाबला नजर आया। कैंट के विधायक सौरभ श्रीवास्तव को कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ. राजेश मिश्रा ने कड़ी टक्कर दी। कैंट विधानसभा पर भाजपा ने विधायक सौरभ श्रीवास्तव पर भरोसा जताया। वहीं कांग्रेस ने पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र, सपा ने पूजा यादव और बसपा ने कौशिक पांडेय को उतारा। कांग्रेस ने इस सीट पर जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया है।
ब्राह्मण, मुसलमान और बंगाली मतदाताओं को आधार बनाकर डॉ. राजेश मिश्रा जीत के दावे कर रहे हैं। हालांकि ब्राह्मणों मतों में सेंधमारी में कांग्रेस यहां काफी हद तक सफल भी रही है। भाजपा प्रत्याशी सौरभ श्रीवास्तव के लिए पार्टी के परंपरागत मतदाताओं का रुझान सबसे अधिक रहा।
विधानसभा चुनाव 2017 के परिणाम
सौरभ श्रीवास्तव 132609
अनिल श्रीवास्तव 71283
रिजवान अहमद 14118
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस मतों के बिखराव के कारण शहर उत्तरी में भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है। शहर की वीवीआईपी सीट पर भाजपा के रविंद्र जायसवाल के सामने कोई खास चुनौती नहीं है। बसपा और कांग्रेस अपने परंपरागत मतदाताओं को ही सहेजने में जुटी रहीं। शहर उत्तरी की सीटों पर मतदाताओं के बिखराव के कारण परंपरागत मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे। मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस प्रत्याशी गुलेराना तबस्सुम और सपा प्रत्याशी अशफाक अहमद डब्लू भी दमदार चुनौती नहीं दे सके।
भाजपा ने जहां अपने परंपरागत मतदाताओं को सहेजा और मुस्लिम मतों में भी सेंध लगाई। मतदान के अंतिम क्षणों तक भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस की नजरें पिछड़े वर्ग के मतदाताओं पर जमी रहीं। हालांकि पिछड़े वर्ग के वोटों में थोड़ा बहुत बिखराव नजर आया। बसपा के श्याम उर्फ रेखा राजभर अपने परंपरागत वोटरों को भी अपने पक्ष में नहीं ला सके और उनके कैडर वोट बंट गए।
विधानसभा चुनाव 2017 के परिणाम
रविंद्र जायसवाल 116017
अब्दुल समद अंसारी 70515
सुजीत कुमार मौर्या 32574
रोहनिया विधानसभा सीट पर चुनावी घमासान त्रिकोणीय है। हालांकि अधिकतर मतदान केंद्रों पर भाजपा-अपना दल (एस) और सपा-अपना दल (क) गठबंधन के प्रत्याशियों में मजबूत लड़ाई रही। पटेल मतदाताओं ने तीनों पटेल प्रत्याशियोंपर भरोसा जताया, लेकिन सवर्ण मतों के बिखराव को रोकने में सपा-अपना दल गठबंधन सफल नहीं हो सका।
सवर्ण अधिकतर भाजपा-अपना दल एस और कांग्रेस प्रत्याशी राजेश्वर पटेल के साथ गए। वहीं पिछडे़ और दलितों का परंपरागत वोट बसपा को मिला। भाजपा-अपना दल (एस) गठबंधन के प्रत्याशी डॉ. सुनील पटेल के पक्ष में माहौल है तो वहीं सपा-अपना दल (कमेरावादी) के प्रत्याशी अभय पटेल की साइकिल भी रोहनिया में तेजी से दौड़ी।
जमीनी नेता और रेलवे से वीआरएस लेकर दूसरी बार किस्मत आजमा रहे कांग्रेस प्रत्याशी राजेश्वर पटेल के व्यक्तिगत व्यवहार पर हर वर्गों का वोट मिलता दिखा। जबकि पिछले दो विधानसभा चुनाव से तीसरे नंबर पर रहने वाली बसपा की हाथी की चाल इस चुनाव में सुस्त दिखी।
विधानसभा चुनाव 2017 के परिणाम
भाजपा- सुरेंद्र नारायण सिंह को मिले मत 119,885
सपा- महेंद्र सिंह पटेल को मिले मत 62,332
बसपा- प्रमोद कुमार सिंह को मिले मत 30,531
नोटा- 2,190
अजगरा विधानसभा में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला है। सोमवार को क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर न केवल बुजुर्ग, महिला बल्कि युवाओं में भी मतदान को लेकर खासा उत्साह दिखा। मतदाताओं में जहां अधिकांश लोगों ने विकास के नाम पर वोट देने की बात कही तो कहीं-कही जातिगत समीकरण भी इस विधानसभा क्षेत्र में हावी होता नजर आया।
ऐसा इसलिए कि अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या अधिक हैं। ऐसे में सभी प्रत्याशी बाकी जातियों संग इस जाति के लोगों को भी साधने में लगे रहे। भाजपा के साथ सपा-सुभासपा गठबंधन प्रत्याशी की सीधी टक्कर मानी जा रही है। बसपा और कांग्रेस के प्रत्याशी भी मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं। सुरक्षित सीट पर अगड़े जाति के मतदातओं का रुझान भाजपा की ओर से रहा। उधर, पिछली जाति के मतदाताओं में बिखराव था और ज्यादातर मतदाताओं की पसंद सुभासपा प्रत्याशी रहे।
सेवापुरी विधानसभा में इस बार सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। इस वजह से प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा दांव पर हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में कहीं मोदी और योगी के नाम पर लोगों ने वोट डाला तो कुछ जगहों पर लोगों ने साइकल यानि सपा पर भरोसा जताया है। देश के पहले आदर्श ब्लॉक की पहचान बनाने वाली सेवापुरी विधानसभा में इस समय भाजपा-अपना दल एस के नीलरतन पटेल विधायक है। पार्टी ने पिछली बार इनकी जीत के बाद एक बार फिर इन पर भरोसा जताया है।
उधर सपा ने 2012 में विधायक और मंत्री रहे सुरेंद्र पटेल को टिकट देकर पटेलों का वोट सहेजने की कोशिश की थी। मतदाताओं से बातचीत के अनुसार भाजपा के शासनकाल में इसी विधानसभा क्षेत्र में रिंग रोड, शहंशाहपुर में बायोगैस प्लांट भी बना है। ऐसे में विकास के नाम पर वोट देने वालों की संख्या अधिक रही। सपा प्रत्याशी सुरेंद्र पटेल भी लोगों ने अपना भरोसा जताया है।
मछली शहर लोकसभा क्षेत्र की पिंडरा सीट पर हार जीत के नतीजे नजदीकी रहने की उम्मीद है। त्रिकोणीय मुकाबले में उलझी इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी अवधेश सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को मिलने वाले मतों के आधार पर बसपा प्रत्याशी बाबू लाल पटेल की रैंकिंग तय होगी।
भाजपा प्रत्याशी डॉ. अवधेश सिंह ने सवर्ण मतों को बटोरा तो वहीं कांग्रेस से प्रत्याशी अजय राय भी तगड़ी लड़ाई में शामिल हैं। जबकि बसपा प्रत्याशी बाबूलाल पटेल ने दलित के साथ ही कुर्मी मतों में पैठ बनाई है। अब कयासबाजी का दौर शुरू हो चुका कि क्या कमल फिर से पिंडरा में खिलेगा या खोई हुई सीट फिर से कांग्रेस के खाते में जा रही है।
जबकि पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहने वाले बसपा के बाबूलाल पटेल भी बड़ा उलटफेर कर सकते हैं। लगातार पांच बार के विधायक रह चुके कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है कि क्या इस बार सीट निकल पाएगी और वहीं मौजूदा विधायक व भाजपा प्रत्याशी डॉ. अवधेश सिंह को अपनी सीट बचाने की है।
विधानसभा 2017 के परिणाम
भाजपा- डॉ. अवधेश सिंह 90,614
बसपा- बाबू लाल पटेल 53,765
कांग्रेस- अजय राय 48,189
नोटा- 2889