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Varanasi: महाकवि जयशंकर प्रसाद के आंगन में जीवंत होंगे कामायनी के पात्र, 135वीं जयंती पर होगा अनूठा आयोजन

Mon, 29 Jan 2024 06:49 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

महाकवि जयशंकर प्रसाद की 135वीं जयंती पर काशी में अनूठा आयोजन होने जा रहा है। इस अवसर पर नागरी प्रचारिणी सभा की ओर से नाट्य मंचन किया जाएगा। इस अनूठे आयोजन के साक्षी काशीवासी बनेंगे।  
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जयशंकर प्रसाद - फोटो : Social Media
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विस्तार
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महाकवि जयशंकर प्रसाद के आंगन में पहली बार महाकाव्य कामायनी के सभी पात्र जीवंत होंगे। महाकवि की 135वीं जयंती पर काशीवासी इस अनूठे आयोजन के साक्षी बनेंगे। नागरी प्रचारिणी सभा के निर्देशन में रूपवाणी के कलाकार मनु, श्रद्धा, इड़ा और मानव के पात्रों को महाकवि के प्रसाद में जीवंत करेंगे।

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कामायनी हिंदी के अप्रतिम कवि जयशंकर प्रसाद की क्लासिक काव्यकृति है। साहित्य-संसार में इस कृति को महाकाव्य सा स्नेह और सम्मान हासिल है। नागरी प्रचारिणी सभा ने नृत्यनाटिका के विन्यास में इसकी मंच-प्रस्तुति तैयार की है। 30 जनवरी को जयंती समारोह पर चेतगंज स्थित प्रसाद मंदिर में इसकी प्रस्तुति के माध्यम से कलाकार महाकवि को नमन करेंगे। 

लोहटिया स्थित रूपवाणी के स्टूडियो में कलाकार इसकी प्रैक्टिस कर रहे हैं। मूल कविता-पंक्तियों के आधार पर नाटक का नाट्यालेख और पार्श्वसंगीत तैयार किया गया है। संगीत पूरी तरह बनारस घराने के शास्त्रीय संगीत पर आधारित है। कामायनी की देहभाषा में तीन नृत्य रूपों छऊ, भरतनाट्यम और कथक के दर्शन होंगे। यह नृत्य नाटिका पारंपरिक शिल्प के माध्यम से एक आधुनिक वक्तव्य होगी। कविता पर आधारित रूपवाणी की यह प्रस्तुति 55 मिनट की होगी। इसमें 15 कलाकार अभिनय करेंगे।

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प्रलय से आरंभ होती है कामायनी की कहानी

नाटक के निर्देशक व्योमेश शुक्ल का कहना है कि कामायनी आधुनिक युग का महाकाव्य है। इसकी कथा प्रलय से प्रारंभ होती है। इस काव्य में प्रसादजी ने मनोविकारों को चरित्रों की भांति निर्मित और विकसित किया है। मसलन काम, लज्जा, चिंता आदि भाव चरित्रों की तरह सामने आते हैं। हम लोग उत्साहित हैं कि महाकवि के आंगन में उनके ही रचित महाकाव्य के मंचन का अवसर मिल रहा है। उनकी कविता का स्मरण संसार की इस प्राचीनतम जीवित संस्कृति का सम्मान है। यह सम्मान संस्थापन, आदिवास, सभ्यता की पुरातात्विकता और शालीन नागरिकता का सम्मान है। जयशंकर प्रसाद की प्रपौत्री कविता जयशंकर ने बताया कि यह पहला मौका है जब कामायनी का मंचन हमारे आवास पर होने जा रहा है।

राष्ट्रीय चित्रकला शिविर का हुआ शुभारंभ
महाकवि जयशंकर प्रसाद साहित्य संस्कृति महोत्सव के अवसर पर रविवार को प्रसाद राष्ट्रीय चित्रकला शिविर का उद्घाटन चेतगंज स्थित प्रसाद मंदिर में हुआ। चित्रकार प्रो. एस प्रणाम सिंह ने दीप जलाकर महोत्सव की शुरुआत की। शिविर में 30 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। कलाकारों ने महाकवि जयशंकर प्रसाद के साहित्य एवं कविताओं पर आधारित चित्र का निर्माण कर रहे हैं। तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन 30 जनवरी को चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस दौरान प्रो. सत्येंद्र बावनी, डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा, डाॅ. शत्रुघ्न प्रसाद, डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता मौजूद रहे।
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