सीरगोवर्धनपुर निवासी युवक की हत्या के आरोप में पत्नी और साढ़ू भेजे गए जेल
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। सीरगोवर्धनपुर निवासी अनिल यादव (33) की हत्या के आरोप में शुक्रवार को उसकी पत्नी अनीता यादव और साढ़ू भदोही जिले के जयरामपुर गांव निवासी सुरेंद्र यादव को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
पुलिस की पूछताछ में अनीता ने बताया कि पति की शराब पीने की आदत और मारपीट से आजिज आकर वह लगभग दो साल पहले अपने बहनोई सुरेंद्र के करीब आई थी। वह चाहती थी कि आगे की जिंदगी अपनी इच्छानुसार वाहन चालक सुरेंद्र के साथ बिताए। इसमें उसका पति अनिल बाधक बन रहा था। इसीलिए उसकी हत्या कर दी। इसके बाद बहनोई के साथ कार से शव ले जाकर चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र में सिंघीताली पुलिया के समीप नाले में फेंक दिया।
लंका थाना क्षेत्र के सीरगोवर्धनपुर का रहने वाला अनिल यादव बीते 16 जून को पत्नी और दो बच्चों को दवा दिलाने की बात कह कर घर से निकला था। इसके बाद उसका पता नहीं लगा। उसी रात दोनों बच्चों के साथ घर वापस लौटी अनीता ने बताया कि अनिल उसे छोड़ कर कहीं गए हैं। 17 जून की सुबह तक अनिल वापस घर नहीं आया तो उसके भाइयों ने उसकी खोजबीन शुरू की। कहीं पता नहीं लगने पर 19 जून को लंका थाने में अनिल की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो अनीता के बदलते बयानों से उस पर शक गहराया। सर्विलांस की मदद से अनिल और अनीता के मोबाइल का कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाला गया तो सुरेंद्र यादव का भी नाम सामने आया। साथ ही यह पता लगा कि तीनों 16 जून की शाम टेंगरा मोड़ पर साथ थे। अनीता और सुरेंद्र से कड़ाई से पूछताछ की गई तो दोनों ने बताया कि उन्होंने 16 जून की देर शाम अनिल की हत्या करने के बाद उसका शव कार से ले जाकर चंदौली में नाले में फेंक दिया था। इसके बाद अनीता को कार से उसके घर छोड़ कर सुरेंद्र अपने घर चला गया था।
दादी और चाचा-चाची के सहारे मासूम बच्चे
पिता अनिल की हत्या और मां अनीता के जेल जाने के बाद दो मासूम बच्चों के सिर से मां-बाप का साया छिन गया है। अनिल की छह साल की बेटी और तीन साल का बेटा अपनी दादी राधा देवी और चाचा-चाची के सहारे हैं। घर में अपने पिता और मां को न देखकर दोनों मासूम बार-बार उनके बारे में पूछ रहे हैं। मां-बाप के जल्द घर आने का आश्वासन देकर दोनों बच्चों को परिजन संभाले हुए हैं। दोनों बच्चों के भविष्य को लेकर उनके परिजनों के साथ ही मुहल्ले के लोग भी खासे चिंतित हैं।