सिविल लाइंस चर्च चौराहे पर ट्रैफिक को कंट्रोल करते होमगार्ड के जवान।-प्लान खबर की फोटो
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आजमगढ़। शहर में यातायात संचालन के लिए सिग्नल का प्रस्ताव बनाया गया, लेकिन यह फाइलों में कैद रह गया। ट्रैफिक संचालन आज भी हाथों से ही किया जा रहा है। बेतरतीब संचालन की वजह से लोग जाम से जूझ रहे हैं। तीन साल पहले के पुलिस और एडीए के प्रयास ठंडे पड़ गए हैं।
शहर के प्रमुख चौराहों की यातायात व्यवस्था सिग्नल के सहारे संचालित करने की कवायद लंबे समय से चल रही है। फिर भी योजना का परिणाम सिफर ही रहा है। यातायात महीने लगभग समाप्त होने को है, लेकिन शहर का ट्रैफिक सुधरा न ही सिग्नल। यातायात संचालन चौराहों पर तैनात होमगार्ड के हाथों के इशारे पर ही हो रहा है। जबकि बोर्ड की बैठक में इसे लेकर कई बार उच्चाधिकारियों ने निर्देश दिए थे। ताकि नरौली तिराहा, हैडिल चौराहा, अग्रसेन चौराहा, पांडेय बाजार चौराहा व जजी चौराहा पर सिग्नल लग सके लेकिन अभी तक यह प्रक्रिया फाइलों में ही अटकी पड़ी है। एडीए का कहना है कि कुछ माह पूर्व पुलिस अधीक्षक यातायात को पत्र जारी कर प्रमुख चौराहों की सूची मांगी थी जहां सिग्नल की आवश्यकता है। पुलिस अधीक्षक यातायात सुधीर जायसवाल ने एडीए को सूची उपलब्ध भी करा दी थी। जहां डिजिटल ट्रैफिक सिग्नल की आवश्यकता है।
इस्टीमेट की पेंच में ट्रैफिक डिजिटल सिग्नल
आजमगढ़। बोर्ड की बैठक में एडीए को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि कार्यदायी संस्था को नामित कर सिग्नल लगवाया जाए। अब सवाल यह है कि सिग्नल लगाने की जिम्मेदारी किसको दी जाए यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। एडीए सचिव बैजनाथ ने बताया कि पीडब्ल्यूडी व आवास विकास को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह सर्वे रिपोर्ट तैयार कर इस्टीमेट बनाएगा। जिसकी स्वीकृति मिलने के बाद सिग्नल बना दिया जाएगा।