सातवीं मुहर्रम पर मंगलवार को जनाबे कासिम की याद में उठने वाले तीन जुलूस नहीं उठाए गए। केवल इमामबाड़ों में मेहंदी और शमां रोशन कर जनाबे कासिम को याद करते हुए लोगों ने नौहा मातम किया। चौहट्टा लाल खां में आसाम के पूर्व गवर्नर स्व. जस्टिस सरफजले अली के इमामबाड़े पर अंजुमन आबिदिया ने नौहा मातम के साथ इमाम हसन के बेटे और इमाम हुसैन के भतीजे 13 वर्षीय जनाबे कासिम की यादव में नौहा मातम किया।
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी सैयद फरमान हैदर ने बताया कि जनाबे कासिम को कर्बला का दुल्हा भी कहा जाता है। वाराणसी में नौ मुहर्रम की रात को दुल्हे का जुलूस निकाला जाता है। पिछले साल की तरह इस साल भी यह जुलूस स्थगित रहेगा। चौहट्टा लाल खां से दूसरा जुलूस जो मस्जिद से उठाकर लाट सरैया सदर इमामबाड़ा पर जाता था, वह भी इस बार नहीं उठा। तीसरा जुलूस बड़ी बाजार में जो कई अंजुमने उठाती थी, वह भी स्थगित रहा। जनाबे कासिम की याद में शहर भर में मजलिस हुई। रात 12 के करीब हर साल की तरह शमां रौशन कर, मेंहदी रखकर, फल, शीरीली के साथ जनाबे कासिम और कर्बला के शहीदों की फातेहा हुई। बुधवार को आठवीं मुहर्रम पर शहर में सुबह से जनाबे अब्बास की याद में मजलिसों का सिलसिला शुरू होगा।
पद्मश्री सोमा घोष ने इमाम हुसैन की याद में पेश किया नौहा
वाराणसी। सामाजिक संस्था काशी कला कस्तूरी ने मुहर्रम और इमाम हुसैन की याद में ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की मानस पुत्री पद्मश्री सोमा घोष ने नौहा पेश कर के इमाम हुसैन और शाहीदान ए कर्बला को नजराना ए अकीदत पेश किया। उन्होंने बिस्मिल्लाह खां साहब का नौहा मारा गया है तीर से बच्चा रबाब का बहुत ही पुरसोज आवाज़ में पढ़ा और दूसरा नौहा परदेस में बहन को चले किस पे छोड़ कर, भईया हुसैन जाते हो क्यों मुंह को मोड़ कर पढ़ा। डॉ. सोमा घोष ने कहा कि आज मुहर्रम के दिन में मुझे अपने बाबा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहब की याद आ गई और आज हम उन्हीं के नक्श ए क़दम पर चलते हुए इमाम हुसैन को नज़राना ए अकी़दत पेश कर रहे हैं। डॉ.शबनम ने कार्यक्रम के शुरू में कर्बला में इमाम हुसैन की कु़र्बानी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन की शहादत पूरी दुनियां को इंसानियत का पैगा़म देती। इंसानियत को जिंदा रखने के लिए ज़ालिम और उसके ज़ुल्म के आगे सिर नहीं झुकाया।