वाराणसी। चकबंदी कार्य में अनियमितता के मामले में कोईराजपुर में पीड़ित को जमीन दिलाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। अब प्रशासन समतुल्य जमीन का प्रस्ताव पीड़ित को देगा। कारण, आठ साल पहले हुई चकबंदी में अब वहां जमीन ही नहीं बची है। उधर, निलंबित हुए दो चकबंदी अधिकारी कुछ महीने पहले भी एक मामले में निलंबित हुए थे और जिलाधिकारी ने इन दोनों के खिलाफ शासन को पत्र भी भेजा था।
पिंडरा तहसील के कोईराजपुर में वीना सिंह की 8500 वर्गफीट जमीन चकबंदी विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मनमाने तरीके से दूसरे के नाम पर दर्ज कर दी थी। वर्ष 2013 में इस गड़बड़ी की शिकायत शुरू हुई, मगर सुनवाई नहीं होने पर जमीन पर कब्जा नहीं मिला। इसके बाद रिंग रोड सहित अन्य परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहित हो गई। कुछ छोटे छोटे-प्लाट बचे मगर वे निजी लोगों के हैं। यहां बता दें कि मुख्यमंत्री के आदेश पर उप संचालक चकबंदी (डीडीसी) प्रकाश राय, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी संजय राय, चकबंदी अधिकारी शैलेंद्र द्विवेदी व लाल सिंह, पेशी कानूनगो राजेश कुमार, चकबंदीकर्ता अमित कुमार सिंह व चकबंदी लेखपाल मंगला चौबे को निलंबित किया गया है। इसमें चकबंदी अधिकारी शैलेंद्र द्विवेदी और लाल सिंह पहले भी निलंबित हुए थे और बहाल होने पर वाराणसी में ही तैनाती ले ली। इनकी कारस्तानियों के चलते ही इनके तबादले के लिए जिलाधिकारी ने इनके खिलाफ शासन को पत्र लिखा था।
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टिकरी में चकबंदी में बड़ी गड़बड़ी
टिकरी गांव में भी चकबंदी में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। यहां चार एकड़ सरकारी जमीन को टुकड़ों में छोड़ा गया है।