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जीवन को दशा व गति प्रदान करने वाला ही आचार्य

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि अंत: पट को खोलने वाला आचार्य है। जो आचरण में बड़ा, प्रज्ञावान, बुद्धिमान, जीवन को दिशा एवं गति प्रदान करने वाला, जो स्वत: प्रकाशित हो, जिसमें गुरुत्व की गहराई है, समर्पण है, अपने शिष्य में शिवत्व को देखता हो, जिसके मन की एकाग्रता के कारण इंद्रियां शांत हैं, वह आचार्य है। जीवन को दशा व गति प्रदान करने वाला ही आचार्य है।
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बुधवार को बीएचयू के अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र में बतौर मुख्य अतिथि आचार्यत्व विषय पर विचार करते हुए डॉ. कृष्णगोपाल ने वर्तमान में शिक्षा जगत में अर्थ के बढ़ते प्रभाव के साथ ही विद्या की बिक्री पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बिना किसी मौलिक शिक्षा दर्शन के कोई राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता है। हमें लौकिक शिक्षा के साथ ही आध्यात्मिक दृष्टि विकसित करने की नितांत आवश्यकता है। अध्यक्षता करते हुए आईयूसीटीई के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत ने कहा कि स्वत्व के बोध को जागृत करने वाला आचार्य है।
विशिष्ट अतिथि पद्मभूषण प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि जो सत और असत के बीच विभेद को मिटाता है वह आचार्य है। संस्था के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने कहा कि जो आचार का आचरण करता है वह आचार्य है। इस दौरान डॉ. पारोमिता चौबे, डॉ. नित्यानंद उपाध्याय, प्रो. हरिश्चंद्र सिंह राठौर, प्रो. राजाराम शुक्ल, प्रो. सुनील सिंह, प्रो. हरिकेश सिंह, डॉ. गोरखनाथ तिवारी, अमरजीत सिंह, डॉ. ऋचा सिंह, डॉ. तिलोत्तमा सिंह, ख्याति, शालिनी, प्रवीन, वीरेंद्र मौजूद रहे।
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