वाराणसी में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन के लिए केंद्र और राज्य सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद दुनिया के कोने-कोने में बसे प्रवासियों को सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। वहीं सोशल मीडिया पर सम्मेलन को लेकर सन्नाटा है।
एक सप्ताह से भी कम समय रहने के बावजूद काशी के लिए इस सुनहरे अवसर की सुनियोजित ब्रांडिंग नहीं हो सकी है। स्थानीय प्रशासन सिर्फ इंतजामों में लगा हुआ है। भाजपा की ओर से भी उदासीनता ही बरती जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय रहते हैं। सोशल मीडिया पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की सक्रियता भी किसी से छुपी नहीं है। फिर भी प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में पहली बार हो रहे विश्वस्तरीय आयोजन के मामले में विदेश मंत्रालय के साथ-साथ प्रवासी भारतीय मंत्रालय और प्रदेश सरकार के एनआरआई विभाग की रुचि अब तक नजर नहीं आ रही है।
कारण जो भी हों, नई दिल्ली और राज्यों की राजधानियों के बाद यहां हो रहे आयोजन को देश-दुनिया में पहुंचाने के लिए संबंधित मंत्रालयों और विभागों के अधिकारियों ने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी काशी के नए पहलुओं और बदलते बनारस की जानकारियां देने की पहल नहीं की है।