बाकी चार में विक्टोरिया मेमोरियल बेनियाबाग, तिलमापुर, चंद्रावती ईंट का किला, बसंत कन्या कालेज में स्मारक की हालत बहुत अच्छी नहीं है। सारनाथ स्थित कार्यालय में भी इसकी जानकारी नहीं है। यहां बता दें कि बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय और ऐतिहासिक तथ्यों पर स्वतंत्र शोध कर रहे अधिवक्ता मिलिंद श्रीवास्तव व नागेश पांडेय की टीम ने वाराणसी में मौजूद स्मारकों का सर्वे किया तो छह स्मारकों का नामो निशान मौके पर नहीं मिले।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग की सूची मे दर्ज वाराणसी के 18 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की मौके पर जाकर खोज में पाया कि चार की हालत ज्यादा खराब है और छह गायब हैं। गायब स्मारकों में पुराने तोपों की लाइन में दो कब्र, तेलियानाला में बौद्ध स्मारक, कोषागार में टेबलेट, वाराणसी में बगावत का स्मारक, धरहरा मस्जिद, ले. कर्नल पोगसंस की कब्र का पता नहीं चल रहा है।
एएसआई की वेबसाइट पर यह हैं स्मारक
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की वेबसाइट पर चेतगंज में कब्रिस्तान, चंद्रावती में ईंट का किला, चौखंडी स्तूूप, हातिमपुर साइट, धम्मेख स्तूप सहित आसपास की जगह, राजघाट पर बंद कब्रिस्तान, राजघाट पर लाल खान का मकबरा, सारनाथ की नरोखर साइट, शिवाला स्थित यूरोपीय अधिकारियों की कब्र, ले. कर्नल पोगसंस की कब्र, तिलमापुर में टीला, धरहरा मस्जिद, वाराणसी में बगावत का स्मारक, मानसिंह महल, क्वींस कालेज मेें अशोक स्तंभ, कोषागार भवन में टेबलेट, तेलिया नाला, विक्टोरिया मेमोरियल और पुराने तोपों की लाइन में दो कब्र।
पटना क्षेत्र में आते हैं पूर्वांचल के 15 जिले
पूर्वांचल के पंद्रह जिले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पटना क्षेत्र में आते हैँ। मिर्जापुर व वाराणसी में सर्वाधिक 19 महत्वपूर्ण स्मारक है। इसके बाद गोरखपुर का तीसरा स्थान है और गाजीपुर 13 स्मारक हैं। आजमगढ, चंदौली में सात, जौनपुर में छह और बलिया, मऊ, संत रविदास नगर व सोनभद्र में एक-एक स्थल हैं।
यह गंभीर मसला है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया जाएगा। जरुरत हुई तो केंद्रीय मंत्रालय और मुख्यालय के अधिकारियों से भी संवाद किया जाएगा। -कौशल राज शर्मा, जिलाधिकारी