प्रो. त्रिपाठी ने देश-दुनिया के वैज्ञानिक जो आविष्कार कर रहे हैं, उसका उल्लेख हमारे वेद-पुराणों में हजारों वर्ष पहले किया जा चुका है। ऋषि-मुनियों के ज्ञान परंपरा को वैज्ञानिक रूप देने के लिए उच्चस्तरीय अनुसंधान की जरूरत है। आइकेएस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भी यही है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन पुस्तकालय में पांडुलिपियों के रूप में बौद्धिक खजाना संरक्षित है। बाह्मी, देवनागरी, मैथिली सहित विभिन्न भाषाओं में पुराण, ज्योतिष, तंत्र शास्त्र, मीमांसा, योग, आयुर्वेद सहित अन्य विषयों पर हस्तलिखित दुर्लभ पांडुलिपियां मौजूद हैं। इन पर शोध की जरूरत हैं।
इंडियन नॉलेज सिस्टम का सेंटर खुलने से भारतीय ज्ञान परंपराओं को और बल मिलेगा। इस शोध परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित अनुसंधान को आगे बढ़ाना है। कुलपति ने बताया कि सहायक प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर डॉ. रविशंकर पांडेय एवं डॉ. ज्ञानेंद्र सांपकोटा को बनाया गया है। इसमें दो प्रोफेसर, एक कंप्यूटर ऑपरेटर तथा परियोजना सहायक भी नियुक्त किए जाएंगे।