सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी का कहना है कि सम्मेलन में आए सुझावों से न केवल महामारी नियंत्रण में किए जाने वाले प्रयासों में सहायता मिलेगी, बल्कि अन्य देशों की तकनीक के बारे में प्रतिभागियों को जानने का मौका मिल रहा है। बताया कि तीन दिन के सुझावों की पूरी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शासन, स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाएगी।
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन महामारी से बचाव के लिए सर्विलांस पर चर्चा की गई। साथ ही देश के विभिन्न राज्यों में कोरोना सहित अन्य बीमारियों से बचाव के प्रबंधन, निगरानी के बारे में विशेषज्ञों ने अपनी बातें रखीं। यूपी स्टेट सर्विलांस अधिकारी डॉ. विकासेंदू अग्रवाल ने इसकी घोषणा की।
डॉ. विकासेंदू ने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत आयुष्मान भारत हेल्थ आईडी कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसमें संबंधित व्यक्ति का पूरा स्वास्थ्य रिकार्ड होगा, जो कि देश में कहीं भी दिखाया जा सकेगा। जल्द ही आभा आईडी कार्ड को ई-कवच, यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस प्लेटफार्म (यूडीएसपी) और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के जरिये ऑफलाइन बनाया जा सकेगा।
बताया कि जल्द ही यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस प्लेटफार्म और ‘यूपी के स्वास्थ्य केंद्र’ एप्लीकेशन को भी लांच किया जाएगा। इससे मरीजों के इलाज में पहले से अधिक सहूलियत होगी। डब्ल्यूएचओ की इंडिया टीम से डॉ. ट्रेन मिन्ह, आईसीएमआर के डॉ. मनोज मुरेकर ने इमरजेंसी वर्कफोर्स रोडमैप, नेशनल पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट की कार्यप्रणाली के बारे में बताया।
यूएस से आए सीडीसी वर्कफोर्स एंड इंस्टीट्यूट डेवलपमेंट ब्रांच के चीफ डॉ. किप बैगेट ने तकनीकी सत्र में बताया कि डब्ल्यूएचओ के माध्यम से पिछले साल पब्लिक हेल्थ एवं इमरजेंसी वर्कफोर्स रोड मैप शुरू किया गया था, जो क्षेत्रीय स्तर पर महामारी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम में अपर निदेशक डॉ. आरती बहल, सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी, एसीएमओ डॉ. एसएस कनौजिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे।