असि के लिए आंदोलन से जुड़े रामयश मिश्र का कहना है बीएचयू के नदी विज्ञानियों ने असि पर रिसर्च के बाद बताया था कि गंगा की तरह ही असि में नदी के सभी गुण मौजूद हैं। नदी की पांच से दस फीट की खोदाई कराने पर भूमिगत जल का स्तर मिलेगा। शिव पुराण के अलावा गोस्वामी तुलसीदास ने भी विनय पत्रिका में इस नदी का उल्लेख किया था।
नदी को पुनर्जीवित करने की चुनौतियां
- नदियों का उद्गम स्थल हो चुका है समाप्त
- तलहटी में मकानों और जमीन की कर दी गई है रजिस्ट्री
- अलॉट कर दिए गए हैं मकान नंबर
- जलनिकासी का प्रमुख जरिया बन चुकी हैं असि व वरुणा
- पूरी तरह से टैप नहीं हुआ है नाला