हालांकि अभी तक एनएच 31 पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों को स्कूल, पंचायत भवन आदि सरकारी संस्थाओं में कहीं शिफ्ट नहीं किया गया है। ऐसे में बीमार बाढ़ पीड़ितों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। गोपालपुर निवासी लक्ष्मण राम की तबीयत काफी खराब है, लेकिन उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। वे एनएच 31 पर शरण लिए हुए हैं। तहसील प्रशासन की तरफ से बाढ़ राहत कैंप की कमान एसडीएम बैरिया दुष्यन्त कुमार मौर्य, तहसीलदार श्रवण कुमार राठौड़ व बांसडीह तहसीलदार गुलाब चंद्रा ने संभाली है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार हमें कुछ नहीं मिल रहा है।
नहीं उपलब्ध हुई नाव, खराब हो रहे सामान :
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 12 घंटे में बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री व आर्थिक मदद देने की बात तो दूर 24 घंटे बाद अब तक बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला नहीं जा सका है। एनडीआरएफ की टीम जरूर लगी है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नाव की कमी खल रही है। आलम ये है कि बाढ़ पीड़ितों के आवश्यक महंगे समान बाढ़ के पानी में भीगकर नष्ट हो रहे हैं।
अगले आदेश तक स्कूल बंद :
बंधा टूटने के बाद कई स्कूलों में पानी चले जाने से शिक्षण संस्थान बंद हो गए हैं। इसकी वजह से महाविद्यालय दुबे छपरा, इंटर कालेज दुबे छपरा, कन्या विद्यालय दुबे छपरा, जूनियर हाई स्कूल पांडेयपुर, प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर सहित सहित दर्जन भर विद्यालय बंद होने से शिक्षण कार्य पूरी तरह से ठप होकर रह गया है। इन सभी स्कूलों को अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया है।
बस सरकारें बदलती रहीं, हमारी नियति नहीं बदली :
पीड़ित पीढ़ितों ने कहा कि हर दूसरे से तीसरे साल हमें अपना आशियाना छोड़कर सड़क पर आना पड़ता है जनप्रतिनिधि बदले, अधिकारी भी बदले, करोड़ों खर्च भी हो गए, लेकिन हम फिर भी बेघर हो गए
उदई छपरा की निवासी अनिता देवी पत्नी बेचू राम ने कहा कि सरकार की तरफ से सर छिपाने के लिए एक अदद तिरपाल व अपर्याप्त भोजन का पैकेट मिला है। इसके अलावा हमें कुछ भी नसीब नहीं हुआ है। कोई हमारा हाल चाल पूछने की जरूरत भी नहीं महसूस कर रहा है। वहीं तेजन राम ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद लगा था कि राहत सामग्री व आर्थिक मदद अब मिलने ही वाला है, लेकिन चौबीस घंटे बाद तक हमें नमक भी मयस्सर नहीं कराया गया। ऐसे कैसे सरकार हमारे साथ है।
गोपालपुर की रहने वाली कलावती देवी पत्नी राजेंद्र पासवान ने बताया कि एन एच 31 के किनारे हमें बेसहारा छोड़ दिया गया है। अब तक स्कूल, पंचायत भवन या किसी भी सरकारी भवन में हमें रहने की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में सड़क किनारे छोटे बच्चों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है। चंदा देवी पत्नी राजेंद्र राम ने कहा कि हमें भोजन के लिए जो लंच पैकेट मिल रहा है, वह पूरे परिवार के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। हमारे निवाले पर भी आफत आ गई है। पशुओं के चारे के नाम पर पांच किलो भूसा दिया जा रहा है, उससे क्या होगा।
मेरे पति लक्ष्मण राम डेढ़ वर्ष से बीमार व अपाहिज हैं। ऐसे में एन एच 31 के किनारे खुले आसमान के नीचे दवा-इलाज भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। हम बाढ़ पीड़ितों पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा है।
-सविता देवी पत्नी लक्ष्मण राम, निवासिनी गोपालपुर
भले ही सरकार ने बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ की टीम लगाई है, नावों की व्यवस्था नहीं होने से हजारों पीड़ित अब भी गांव में फंसे हुए हैं। सामान भी नहीं निकल पा रहा है।
-अमित कुमार दुबे, निवासी दुबे छपरा