गर्भगृह में महाआरती के बाद बाबा का शृंगार किया जाएगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में रंगभरी एकादशी पर दिव्य, भव्य और नव्य स्वर्णिम गर्भगृह में बाबा विश्वनाथ सपरिवार विराजेंगे। सोमवार को आरती भोग के बाद बाबा विश्वनाथ की चल रजत प्रतिमा का दर्शन शुरू होगा जो शाम चार बजे तक चलेगा।
शाम पांच बजे पालकी यात्रा निकाली जाएगी। भोले बाबा जब गौना कराने जाएंगे तो उनका राजशाही स्वरूप निखर कर सामने आएगा। अहमदाबाद से आई खादी के परिधान और सिर पर राजसी पगड़ी होगी। वहीं माता गौरा ब्रज से आई चुनरी को धारण करेंगी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम शिवांजलि के स्थान में भी परिवर्तन किया गया है। इस बार कार्यक्रम का मंच महंत आवास के बगल में खुले स्थान पर बनाया जाएगा। इस वर्ष सांस्कृतिक अनुष्ठान शिवांजलि में देश-विदेश के कलाकारों की हाजिरी लगेगी।
तबला वादक पंडित अशोक पांडेय, सुचरिता गुप्ता, पागल बाबा मुख्य आकर्षण होंगे। सूफियाना रॉक के लिए गायक अमित त्रिवेदी विशेष गायन करेंगे। इनके अलावा आराधना सिंह, नैना मिश्रा और प्रियंका पांडेय भी भजनों की प्रस्तुति देंगी।
श्री काशी विश्वनाथ डमरू दल के डमरुओं का निनाद मणिकर्णिका की मसान की होली में गूंजेगा। श्री काशी विश्वनाथ डमरू दल सेवा समिति की ओर से 15 मार्च को ब्रह्मनाल स्थित श्री बाल भैरव मंदिर से बाबा मशान की पालकी यात्रा निकलेगी। रविवार को ब्रह्मनाल में समिति की बैठक में तय हुआ कि पालकी दोपहर 12:30 बजे मणिकर्णिका घाट स्थित बाबा श्मशाननाथ की आरती के बाद चिता भस्म की होली खेलकर मोटरबोट से हरिश्चंद्र घाट चिताभस्म की होली खेलेगी। इसके बाद दोबारा मणिकर्णिका बाबा लूधेश्वर महादेव पर आकर यात्रा को विश्राम देंगे।