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Varanasi: रामायण उत्सव में नमो घाट पर साकार हुई राम की शक्ति पूजा, कलाकारों ने कार्यक्रम को बना दिया यादगार

Tue, 30 Jan 2024 05:53 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

राम की शक्ति पूजा का 101वां मंचन कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति से यादगार बना दिया। नमो घाट के मुक्ताकाशीय मंच पर पूरब और पश्चिम के कलाकारों के वाद्यवृंद की प्रस्तुतियों का संगम हुआ। इस दौरान कलाकारों ने दर्शकों का मन मोह लिया। 
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varanasi news - फोटो : नीरज कुमार
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय रामायण उत्सव की अंतिम निशा में नमो घाट के मुक्ताकाशीय मंच पर राम की शक्ति पूजा साकार हुई। रूपवाणी के कलाकारों ने राम की शक्ति पूजा के 101वें मंचन को यादगार बना दिया। राम की शक्ति पूजा और शक्ति के आशीर्वाद के साथ ही अंतरराष्ट्रीय रामायण उत्सव का दूसरा चरण संपन्न हुआ।

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अंतिम प्रस्तुति व्योमेश शुक्ल के निर्देशन में नाटक राम की शक्ति पूजा में सम्मिलित पात्रों ने अपने जीवंत अभिनय से श्रीराम द्वारा रावण से युद्ध में विजय की कामना से की गई शक्ति पूजा की प्रस्तुति से दर्शकों को भक्ति भाव से भर दिया। अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान संस्कृति विभाग एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय रामायण उत्सव का शुभारंभ सोमवार को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजेश्वर आचार्य ने दीप जलाकर की। 

कार्यक्रम में प्रथम संगीतांजली श्री अग्रसेन पीजी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिवानी शुक्ला ने अपने गायन से अर्पित की। उन्होंने गायन की शुरुआत राग भीमपलासी में प्रणवरंग द्वारा निबद्ध रचना अलबेलो अवध कुमार...से की। इसके बाद गुरु प्रभावरंग द्वारा रचित अयोध्या धाम के नवीन स्वरूप को समर्पित रचना चला चली गुइयां धाम दुवारे दीन दयाला जहां अवतारे...की प्रस्तुति दी।

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पूरब और पश्चिम के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने किया भावविभोर

दूसरी प्रस्तुति फ्रांस की हेलेन लेगार्डे के सेलियो वादन के नेतृत्व में वाद्य वृंद की रही। इसमें पूरब और पश्चिम के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने हर किसी को भावविभोर कर दिया। लंदन की सुषिर वाद्य, अकार्डियन वादिका कटिंका तथा स्कॉटलैंड के ताल वाद्य दरबुका वादक स्टुवर्ड और केनॉट का गिटार वादन था। तबला वादन पं. अशोक पांडेय और वायलिन वादन पं. सुखदेव मिश्र का रहा। वाद्य वृंद का आरंभ राग हेमवती में तीनताल में निबद्ध रचना से हुआ। 

तीसरी प्रस्तुति में बीएचयू मंच कला संकाय की प्रो. शारदा वेलंकर ने गायन की शुरूआत राम भजन राम कहो बांवरे, मेरो मन राम ही राम रटे, ऐसो को उदार जग माही...से की। चौथी प्रस्तुति अभिजीत चक्रवर्ती के कथक की रही। इस दौरान अशोक कपूर, अंशुमान महाराज, श्रीधर मिश्रा उपस्थित रहे। समन्वय अतुल सिंह तथा संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य एवं सौरभ चक्रवर्ती ने किया।
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