दूसरी प्रस्तुति फ्रांस की हेलेन लेगार्डे के सेलियो वादन के नेतृत्व में वाद्य वृंद की रही। इसमें पूरब और पश्चिम के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने हर किसी को भावविभोर कर दिया। लंदन की सुषिर वाद्य, अकार्डियन वादिका कटिंका तथा स्कॉटलैंड के ताल वाद्य दरबुका वादक स्टुवर्ड और केनॉट का गिटार वादन था। तबला वादन पं. अशोक पांडेय और वायलिन वादन पं. सुखदेव मिश्र का रहा। वाद्य वृंद का आरंभ राग हेमवती में तीनताल में निबद्ध रचना से हुआ।
तीसरी प्रस्तुति में बीएचयू मंच कला संकाय की प्रो. शारदा वेलंकर ने गायन की शुरूआत राम भजन राम कहो बांवरे, मेरो मन राम ही राम रटे, ऐसो को उदार जग माही...से की। चौथी प्रस्तुति अभिजीत चक्रवर्ती के कथक की रही। इस दौरान अशोक कपूर, अंशुमान महाराज, श्रीधर मिश्रा उपस्थित रहे। समन्वय अतुल सिंह तथा संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य एवं सौरभ चक्रवर्ती ने किया।