रक्षाबंधन पर इस बार फिर भद्रा की छाया रहेगी। भद्रा के कारण दोपहर बाद ही बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। रक्षाबंधन पर बुधादित्य, सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग के साथ ही श्रवण नक्षत्र का संयोग बन रहा है। सावन के पांचवें सोमवार का संयोग भी इस त्योहार को बेहद खास बना रहा है। स्नान और दान की पूर्णिमा में भक्त गंगा स्नान करेंगे।
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काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय के अनुसार रक्षाबंधन पर दो बड़े ग्रह सूर्य और शनि अपनी राशि में रहेंगे। सूर्य अपनी सिंह राशि में रहेंगे तो शनि कुंभ राशि में विराजमान होंगे। सूर्य और बुध दोनों के सिंह राशि में होने से बुधादित्य योग का निर्माण होगा।
ज्योतिष शास्त्र में यह योग सुख, समृद्धि और व्यापारिक क्षेत्र में प्रगतिदायक माना जाता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और शोभन योग भी संपूर्ण दिन व्याप्त रहेगा। यह शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इस दिन श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग बन रहा है।
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श्रवण नक्षत्र सुबह 8:49 तक रहेगा। इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र संपूर्ण दिन व्याप्त रहेगा। ये दोनों नक्षत्र ही शुभ माने गए हैं। भद्रा 18 अगस्त की अर्धरात्रि के बाद 3:06 बजे से 19 अगस्त को दिन में 1:31 बजे तक रहेगी। इसलिए भद्रा काल में रक्षाबंधन पर्व मनाना वर्जित है। इसलिए भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। दोपहर 2:02 बजे से शाम 6:30 बजे तक क्रमशः चर, लाभ,अमृत, व चर के अच्छे चौघड़िये रहेंगे। इसलिए इस समय के दौरान रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाना शुभ रहेगा। पूर्णिमा 19 अगस्त को रात्रि 11:56 बजे तक रहेगी।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
दोपहर 1:31 से शाम 6:30 तक का समय राखी बांधने के लिए सबसे उपयुक्त
रक्षासूत्र धारण करने से दूर होते हैं रोग
भविष्यपुराण के अनुसार विधि-विधानपूर्वक रक्षासूत्र धारण करने पर व्यक्ति के समस्त रोग उससे दूर रहते हैं। उसे जीवन भर आरोग्य सुख मिलता है। रक्षासूत्र धारण करने पर जाने अनजाने जो भी अशुभ कार्य होते हैं, वे सभी नष्ट हो जाते हैं। श्रावण पूर्णिमा या रक्षाबंधन पर अपने कुलपुरोहित या श्रेष्ठ विद्वतजन से अपनी कलाई पर रक्षासूत्र अवश्य बंधवाना चाहिए। तत्पश्चात उन्हें यथा सामर्थ्य भेंट व नकद द्रव्य देकर उनसे आशीर्वाद लेना चाहिए।
जन्मतिथि के अनुसार बांधे राखी
ज्योर्तिविद विमल जैन ने बताया कि रक्षाबंधन के पर्व को और अधिक खुशनुमा बनाने के लिए जन्मतिथि और राशि के रंग के अनुसार बहनें यदि राखी बांधें तो भाइयों के सौभाग्य में वृद्धि होगी और उनके जीवन में खुशहाली भी आएगी। सामान्यत: सुनहला, पीला और लाल रंग की राखी बांधने का रिवाज है।