बसपा नेता और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी राजेश यादव सियासत में पुराने खिलाड़ी नहीं थे। राजनीति में आए उन्हें मात्र सात साल हुए थे लेकिन इन सात सालों में उनका सियासी सफर काफी तेजी से आगे बढ़ा।
महज सात साल के सियासी सफरनामे में तेजी से आगे बढ़ रहे राजेश यादव की महत्वाकांक्षा सियासी जगत को भौचक्का कर रही थी। मर्चेंट नेवी में इंजीनियर का जॉब कर रहे 45 वर्षीय राजेश यादव नौकरी छोड़कर 2010 में पहली बार राजनीति की तरफ मुखातिब हुए।
तब वह पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य चुने गए। इसके बाद 2017 ज्ञानपुर विधानसभा से बसपा के टिकट पर वह मैदान में उतरे और मोदी लहर में तीसरा स्थान हासिल किया। पिछले विधानसभा चुनाव से पूर्व राजेश यादव के व्यक्तित्व को कम लोग ही जानते रहे होंगे।
जिला पंचायत सदस्य रहने के दौरान भी उनकी राजनीतिक सक्रियता उल्लेखनीय नहीं रही। लेकिन, धीरे-धीरे वह सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनते गए और 2017 आते-आते एकदम से चर्चा में आ गए।
तब तक उन्हें बसपा से चुनाव का टिकट मिल गया और वह विधानसभा प्रभारी भी बना दिए गए थे। राजेश यादव के नजदीकियों की मानें तो वह ईंट भट्ठे के कारोबार और ठेकेदारी भी जुड़े थे।
राजेश यादव अपने परिवार के साथ इलाहाबाद में ही रहते थे, जबकि माता-पिता और अन्य परिवारीजन यहां गांव पर रहते थे। गौरतलब है कि राजेश यादव की इलाहाबाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई।