नगर निगम मिनी सदन में बैठक करते महापौर अशोक तिवारी व पाषर्द।
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महिला पार्षदों के साथ आए पतियों का कुर्सियों पर कब्जा
सदन की पहली बैठक में महिला पार्षदों के साथ आए पतियोंं ने कुर्सियों पर कब्जा कर लिया। जब पार्षद आने लगे तो सभी कुर्सियां भर गईं। कुर्सी नहीं मिलने पर पार्षदों ने मेयर से शिकायत की। इसके बाद मेयर ने बैठक के दौरान घोषणा की कि जो पार्षद न हों, कृपया इस बैठक से बाहर चले जाएं। इसके बाद सुरक्षा में लगे नगर निगम के अधिकारियों ने पार्षद पतियों को कुर्सी से उठाकर हाॅल के बाहर किया।
वार्डों में कराए जाएंगे ये कार्य
सीवर, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, चौका, सड़क, सफाई, गलियोंं का विकास किया जाएगा। कुओं, मैनहोल चैंबर व पेयजल पाइप लाइनों की सफाई, हाई मास्ट लाइटें लगेंगी। पार्कों का सुंदरीकरण, तालाबों की सफाई और सुंदरीकरण, बंद ट्यूबवेल को चालू, सीवर में मिले पेयजल की पाइप लाइनों को बदलने का कार्य होगा।
मेयर ने कायम की नई परंपरा, बोले, अंग्रेजों की बनाई है व्यवस्था
सदन की बैठक में खास बात रही की मेयर ने गाउन नहीं पहना और नई परंपरा की शुरुआत की। गाउन के बगैरी ही उन्होंने सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया। इस बीच शिवाला से भाजपा पार्षद राजेश यादव चल्लू ने मेयर से पूछा कि आप बगैर गाउन के कुर्सी पर बैठे हैं। इस पर मेयर ने जवाब दिया और कहा कि गाउन अंग्रेजों की ओर से बनाई गई व्यवस्था का प्रतीक है। हम लोकतंत्र में रहते हैं। पार्षद और मेयर को शहर की जनता ने चुना है। गरिमा गाउन से नहीं बल्कि कार्यों से होती है। मेरा विवेकाधिकार है, इस नाते गाउन नहीं पहना।
आदमपुर के सामान्य विभाग के जेई से स्पष्टीकरण तलब
आदमपुर के पार्षदों ने सवाल उठाया कि क्षेत्र के सामान्य विभाग के जेई सीपी पांडेय जनप्रतिनिधियों का फोन नहीं उठाते हैं। इससे जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है। इस पर मेयर ने नगर निगम के मुख्य अभियंता को जिम्मेदारी सौंपी कि बुधवार की सुबह 10 बजे तक संबंधित जेई का स्पष्टीकरण लेकर जानकारी दें।
जलकल के सभी जेई का लिया जाएगा स्पष्टीकरण
बैठक में अधिकतर पार्षदों ने दूषित जलापूर्ति और सीवर की समस्या बताई। ज्यादातर पार्षदों की एक ही समस्या को देखते हुए मेयर ने नगर आयुक्त से कहा कि महाप्रबंधक जलकल के माध्यम से सभी जेई का स्पष्टीकरण लिया जाए।
नगर निगम, जलकल के अधिकारी नहीं उठाए फोन तो होगी कार्रवाई
मेयर ने चेताया कि नगर निगम और जलकल के अधिकारी यदि जनप्रतिनिधियों का फोन नहीं उठाएंगे तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी नगर आयुक्त को दी गई है।