काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारियों और लिपिकों की संपत्ति का ब्योरा शासन ने तलब किया है। शिकायत है कि मंदिर के कर्मचारियों ने अकूत संपत्ति बनाई है। मंदिर में तैनात कर्मचारियों, सेवादारों ने कई मकान, भूमि और प्लॉट भी खरीद लिए हैं। ऐसे कर्मचारियों को अपने पूरे परिवार के सदस्यों के नाम अर्जित संपत्ति का विवरण देने के लिए कहा गया है। मंदिर प्रशासन ने फिलहाल ऐसे करीब 50 कर्मचारियों के मानदेय पर रोक लगा दी है। कहा है कि अगर वे संपत्ति का ब्योरा नहीं देंगे, तो मानदेय का भुगतान नहीं किया जाएगा।
शासन के निर्देश पर अमल कराने के लिए न्यास परिषद ने तो अपनी संस्तुति दी ही है, कार्यपालक समिति ने भी प्रस्ताव पारित कर दिया है। अर्चकों, लिपिकों और सेवादारों को कहा गया है कि वे अपने परिवार के सभी सदस्यों के नाम अर्जित संपत्ति का विवरण जल्द जमा कर दें। इसमें उनके माता-पिता के अलावा, पत्नी, पुत्र और अविवाहित पुत्री के नाम की संपत्ति का ब्योरा देने के लिए कहा गया है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने बताया कि मंदिर में तैनात सभी कर्मचारियों, पुजारियों को शासन के निर्देश से अवगत करा दिया गया है।
पहली जनवरी से इसे लागू किया गया है। कुछ महीने पहले शासन ने मंदिर के कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि इसी शर्त पर की थी कि वे अपनी संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करेंगे। कर्मचारी हमेशा अपना दुखड़ा गिनाते रहे हैं कि पूजा-पाठ और दक्षिणा के अलावा मामूली मानदेय से उनका भरण-पोषण नहीं हो पाता। शासन के निर्देश के बावजूद अभी तक किसी पुजारी या कर्मचारी ने अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है। मंदिर प्रशासन ने ऐसे सभी कर्मचारियों के मानदेय भुगतान पर रोक लगा दी है।